बेंगलुरु , जुलाई 19 -- कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से 39 प्रतिशत कम रहने से राज्य में पीने के पानी और खेती का संकट गहराता जा रहा है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को बताया कि मानसून की कमी के कारण जलाशयों में पानी का भंडार पिछले साल के स्तर का लगभग आधा रह गया है, बुवाई का काम बाधित हुआ है और सैकड़ों गांवों में पीने के पानी की कमी हो गई है।

श्री शिवकुमार ने उपायुक्तों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बारिश की कमी से लगभग पूरे राज्य के प्रभावित होने की बात कही। उन्होंने राज्य के 26 जिलों के 158 तालुकों में कम बारिश दर्ज होने का जिक्र करते हुए कहा कि 20 तालुकों में पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। विजयनगर जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जहां बारिश में 67 प्रतिशत की कमी आई है।

राज्य के प्रमुख जलाशयों में अब केवल 359.98 टीएमसी पानी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 681.83 टीएमसी था। इस तरह उपलब्ध भंडार पिछले साल के स्तर का लगभग 40 प्रतिशत रह गया है। लिंगनमक्की, सुपा और वाराही के पनबिजली जलाशयों में उनकी क्षमता का केवल 23 प्रतिशत पानी है।कमजोर मानसून के कारण कृषि गतिविधियां भी काफी प्रभावित हो रही हैं। खरीफ की बुवाई के 84.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 43.98 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो इसी अवधि के लिए पांच साल के औसत 51.33 लाख हेक्टेयर से काफी कम है। पीने के पानी की स्थिति यह है कि 122 तालुकों में फैली 539 ग्राम पंचायतों से पानी की कमी की सूचना मिली है। वर्तमान में 112 गांवों में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि 622 गांवों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 725 निजी बोरवेल किराए पर लिये गये हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लापरवाही नहीं बरतने की चेतावनी देते हुए प्रशासन को पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन की घोषणा की।उन्होंने खराब पड़े आरओ प्लांट की तत्काल मरम्मत के आदेश भी दिए और मंत्रियों तथा विधायकों को स्थिति पर नजर रखने के लिए क्षेत्र का दौरा तेज करने का निर्देश दिया।

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