प्रयागराज , जुलाई 16 -- उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले के मेजा क्षेत्र में मानसून की सुस्ती के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान की रोपाई के मुख्य मौसम में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं और किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होने को मजबूर हैं। वहीं नहरों की बदहाल स्थिति ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

क्षेत्र में पर्याप्त बारिश न होने से धान की तैयार नर्सरी सूखने लगी है। पानी के अभाव में रोपाई का कार्य लगातार प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों को उत्पादन घटने और आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी है। किसानों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में वर्षा के अभाव में नहरें सिंचाई का प्रमुख साधन होती हैं, लेकिन मेजा क्षेत्र की कई नहरों की सफाई और मरम्मत का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसके कारण नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है और बड़ी संख्या में खेत सिंचाई से वंचित हैं।

सिंचाई व्यवस्था बाधित होने के कारण किसानों को महंगे डीजल पंप और निजी ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका सबसे अधिक असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है। किसान राजेश और शैलेन्द्र ने प्रशासन तथा सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही नहरों की मरम्मत पूरी कर उनमें पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो धान की फसल को भारी नुकसान होगा और किसानों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

इस संबंध में नहर विभाग के अधिकारी ए.के. शर्मा ने बताया कि समस्या विभाग के संज्ञान में है और नहरों से संबंधित कार्य जल्द पूरा कर किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

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