जयपुर , अप्रैल 24 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि प्राचीन भारतीय अवधारणा में तकनीकी का उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन न होकर हमेशा मानवहित रहा है और मानवता के साथ प्रौद्योगिकी की सोच के साथ आगे बढ़ना होगा तभी एक स्थाई विकास का मॉडल स्थापित कर पाएंगे।
श्री देवनानी ने शुक्रवार को पैसिफिक विश्वविद्यालय उदयपुर के कॉमर्स एंड मैनेजमेंट विभाग की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विकास, पर्यावरण एवं सामाजिक चुनौतियां पर सामूहिक रूप से विचार करने की आवश्यकता है। सतत एवं टिकाऊ विकास के लिए यह अत्यत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत के ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का मानव चेतना के साथ सहयोगी एवं पूरक संबंध रहा है। भारत में वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा सदियों से चली आ रही है और हमारा व्यावसायिक दृष्टिकोण ऐसा हो जो विश्व परिवार को आधार बनाकर प्रकृति एवं मानवता के लिए सहयोगी के रूप में सामने आये।
श्री देवनानी ने कहा कि आज के समय में व्यवसाय सिर्फ अर्थ कमाने की इकाई नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन, सामाजिक समावेशन एवं पारदशी गवर्नेन्स के माध्यम से प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को एक साथ आगे आकर राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की व्यवस्था में सहयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हम पाठ्यक्रम तक ही सीमित ना रहे बल्कि शोध करे और उसके बारे में नयी पीढ़ी को जागरूक करें। हमें हमारे व्यावसायिक मापदंडों को पुनर्परिभाषित करना होगा और इस आधार पर आगे का मार्ग प्रशस्त करना होगा।
श्री देवनानी ने कहा कि मानव चेतना एवं तकनीक का बहुत गहरा संबंध है। प्राचीन भारतीय बौधिकता बहुत उच्च स्तर पर थी। उस वक्त बिना शब्दों से मन के माध्यम से संवाद करने की तकनीक विकसित कर ली गई थी। वर्तमान एआई तकनीक प्राचीन भारतीय बौद्धिकता का आधुनिक स्वरूप है।
पैसिफिक विश्वविद्यालय के निदेशक प्रोफेसर बीपी शर्मा ने कहा कि हमे अपने उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए एक स्थाई विकास को प्राप्त करना होगा।
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