नयी दिल्ली , जुलाई 10 -- उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं बल्कि ऐसा राष्ट्रीय मंत्र था जिसने मातृभूमि के प्रति प्रेम को एक पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।
श्री राधाकृष्णन ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) में 'वंदे मातरम' पर स्थायी प्रदर्शनी तथा 'सरदार पटेल के अखंडता, एकीकरण और संघीयवाद के दृष्टिकोण' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि देश 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का स्मरण कर रहा है। ऐसे अवसर केवल इतिहास को याद करने के लिए नहीं, बल्कि उसकी आत्मा से पुनः जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि नवाचार किसी राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं, लेकिन किसी महान राष्ट्र की नींव उसके विचारों पर टिकी होती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम' ने विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को एक साझा राष्ट्रीय भावना से जोड़ा। यह अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए साहस, बलिदान और आशा का स्रोत बना।
श्री राधाकृष्णन ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने केवल सैकड़ों रियासतों का ही एकीकरण नहीं किया, बल्कि भारतीयों के दिलों को भी जोड़ा और एक राष्ट्र, एक संविधान तथा साझा भविष्य की मजबूत नींव रखी।
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