नयी दिल्ली , मई 07 -- चारकोल, एक्रिलिक और मिश्रित माध्यमों को कागज एवंकला संस्कृति प्रदर्शनी कैनवास पर मानव सभ्यता और प्रकृति के गहरे संबंधों को जीवंत करने वाली दिल्ली की चित्रकार ज्योति त्यागी की एकल प्रदर्शनी "स्टोरीज़ द सॉइल रिमेम्बर्स" राजधानी में 08 से 14 मई तक आयोजित की गयी है1त्रिवेणी कला संगम की श्रीधरानी गैलरी में लगायी जा रही इस कला प्रदर्शनी को कवि, कला समीक्षक और क्यूरेटर प्रयाग शुक्ला ने सजाया है।इसमें रखी गयी ज्योति त्यागी की चुनिंदा कृतियां प्रकृति, स्मृति और पारिस्थितिक संवेदनशीलता से जुड़े विषयों पर आधारित एक सशक्त कलाकृतियों का संकलन प्रस्तुत करती है।

कलाकार के चित्र मानव बस्तियों के समानांतर मोर, वृक्ष और प्रतीततः बंजर परिदृश्यों जैसे आवर्ती रूपांकनों के माध्यम से कलाकार मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे परस्पर संबंध को प्रतिबिंबित करते हैं। साथ ये चित्र इस बात को रेखांकित करते हैं कि हमें प्रकृति से कितना पोषण प्राप्त होता है और प्रक्रति का संरक्षण , उसके प्रति संवेदना हमारी गहरी जिम्मेदारी है।

देश भर में कई प्रतिष्ठित दीर्घाओं में प्रदर्शनी लगा चुकी महिला चित्रकार ज्योति का कहना है, "रचनात्मकता बचपन से ही मेरे स्वभाव का हिस्सा रही है, लेकिन मैंने 2008 के आसपास नियमित रूप से पेंटिंग करना शुरू किया, जिसे धीरे-धीरे एक समर्पित और विकसित होती कलात्मक साधना में रूपांतरित किया।"चारकोल और पेस्टल्स उन्हें सहज और कच्चे रेखांकन की स्वतंत्रता देते हैं, वहीं एक्रिलिक उन्हें परतें और गहराई निर्मित करने का अवसर प्रदान करता है। वे अक्सर सतह को खुरचती हैं, जिससे नक़्क़ाशी जैसे चिह्न बनते हैं, जो तनाव और स्पर्शनीयता का भाव उत्पन्न करते हैं। उनके अपने हालिया कार्यों का यह संग्रह "स्टोरीज़ द सॉइल रिमेम्बर्स" एक प्रश्न से शुरू हुआ: जब भूमि पर लगातार निर्माण होता है, तो वह अपने भीतर क्या संजोए रखती है? तेजी से बदलते समय में, त्यागी आत्ममंथन के महत्व पर ज़ोर देती हैं-यह प्रश्न उठाते हुए कि समाज कितनी दूर तक प्रगति कर रहा है और इस प्रक्रिया में क्या पीछे छूट रहा है।

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