भुवनेश्वर , मई 02 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को राज्य के शैक्षिक तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव का आह्वान किया और राज्य को देश के प्रमुख ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री माझी ने कहा कि शिक्षा में परिवर्तन लाना उनकी सरकार की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार पीढ़ी के निर्माण के मिशन का केंद्र बिंदु है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही गतिरोध को समाप्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई नयी शिक्षा नीति का उद्देश्य भारत को वैश्विक ज्ञान राजधानी के रूप में स्थापित करना है और ओडिशा इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार प्रदेश के बच्चों को उद्योग जगत के लिए तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा को प्रमुख शासन प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शिक्षा क्षेत्र के लिए 41,273 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
उन्होंने कहा कि इस अभूतपूर्व आवंटन से शैक्षिक अवसंरचना को मजबूती मिलेगी और ओडिशा के युवाओं के लिए विश्व स्तरीय शिक्षा प्रणाली का निर्माण होगा। ग्रामीण एवं शहरी शिक्षा के बीच लंबे समय से चली आ रही खाई को पाटने के लिए उन्होंने 'गोदाबरीश मिश्रा आदर्श विद्यालय' योजना के शुभारंभ पर प्रकाश डाला। इस पहल के तहत राज्य सरकार 6,794 ग्राम पंचायतों में से प्रत्येक में एक आधुनिक विद्यालय स्थापित करने के लिए 12,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इन संस्थानों में शहरी विद्यालयों के समकक्ष उन्नत कक्षाएं, प्रयोगशालाएँ और खेल-कूद की सुविधाएं होंगी, जिससे ग्रामीण छात्रों को उनके घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
श्री माझी ने समावेशिता एवं सामाजिक समानता पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि सरकार ने उच्च शिक्षा में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) के छात्रों के लिए 11.25 प्रतिशत आरक्षण शुरू किया है। उन्होंने अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए 'शहीद माधो सिंह हाथ खर्चा योजना' के अंतर्गत प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता की भी घोषणा की ताकि स्कूल छोड़ने की दर को कम किया जा सके और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच शैक्षिक भागीदारी में सुधार किया जा सके।
उन्होंने बताया कि उड़िया भाषा एवं सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े कदम के तहत राज्य सरकार ने उड़िया में तकनीकी एवं उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए इग्नू के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि इस कदम से भाषा संबंधी बाधाएं दूर होंगी और छात्रों को मातृभाषा में जटिल विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान श्री मांझी ने मुख्यमंत्री के इंटर्नशिप दिशानिर्देश पुस्तिका का अनावरण भी किया और युवा और महिला छात्रों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 'शक्तिश्री' मोबाइल ऐप लॉन्च किया।
इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा की संस्कृति और शिक्षा के अनूठे मिश्रण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ओडिशा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां विरासत एवं ज्ञान असाधारण सामंजस्य के साथ सह-अस्तित्व में हैं। उन्होंने ओडिशा की वैश्विक सभ्यतागत पहचान को बढ़ाने में आदिकवि सरला दास, फकीर मोहन सेनापति और भीमा भोई जैसे प्रतिष्ठित उड़िया साहित्यिक एवं दार्शनिक व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
ओडिशा की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए श्री प्रधान ने कहा कि राज्य की लगभग 70 प्रतिशत आबादी की उम्र 44 वर्ष से कम है, जो नवाचार एवं प्रगति के लिए अपार अवसर पैदा करती है। उन्होंने कहा कि ओडिशा का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) वर्तमान में 23 प्रतिशत है । उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह 2036 तक इसे राष्ट्रीय औसत 29 प्रतिशत से ऊपर ले जाए।
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने कार्यशाला को नीतिगत संवाद से कहीं अधिक बताते हुए इसे एक विकसित ओडिशा के निर्माण के लिए एक विचार-विमर्श शिविर कहा। उन्होंने कहा कि राज्य ने पीएम उषा योजना के अंतर्गत 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त की है और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ाने के लिए 14 विश्वविद्यालयों में नए कुलपतियों की नियुक्ति की है।
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