बैतूल , जुलाई 15 -- मध्यप्रदेश में बैतूल शहर के प्रमुख जल स्रोत माचना एनीकेट में गाद, कचरा और मलबा जमा होने से इसकी जल भंडारण क्षमता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एनीकेट की तत्काल सफाई और संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार ताप्ती बैराज बनने से पहले माचना एनीकेट शहर की जलापूर्ति का मुख्य स्रोत था। वर्तमान में भी बैराज से जलापूर्ति बाधित होने की स्थिति में यह बैकअप जल स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी उपेक्षा भविष्य में पेयजल संकट को बढ़ा सकती है।
नागरिकों का कहना है कि इस वर्ष बारिश शुरू होने के बावजूद एनीकेट के सभी गेट नहीं खोले गए। उनका आरोप है कि केवल दो गेट आंशिक रूप से खोले जाने के कारण नदी के साथ आने वाला कचरा, गाद और अन्य मलबा जलाशय में ही जमा हो गया, जिससे जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हुई है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बारिश से पहले एनीकेट का गहरीकरण तो कराया गया, लेकिन निकाली गई मिट्टी को हटाने के बजाय किनारे पर ही छोड़ दिया गया, जो पहली ही बारिश में दोबारा जलाशय में बहकर पहुंच गई।
नागरिकों के अनुसार पिछले वर्ष भी पर्याप्त जल संग्रहण नहीं होने से गर्मियों में शहर को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा था। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि समय रहते गाद और मलबे की सफाई नहीं कराई गई तो आगामी गर्मियों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका से एनीकेट के सभी गेट नियमानुसार खोलने, जमा गाद एवं मलबे की तत्काल सफाई कराने तथा जल स्रोत के संरक्षण के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाने की मांग की है।
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