शिमला , मई 24 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी संजय गुप्ता की प्रस्तावित नियमित नियुक्ति और सेवा विस्तार की अटकलों के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।

माकपा के हिमाचल प्रदेश राज्य सचिव संजय चौहान ने आज यहाँ जारी एक बयान में आरोप लगाया कि सरकार का यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार और कदाचार के गंभीर आरोपों की न्यायिक जांच चल रही है, यह प्रस्तावित नियुक्ति पूरी तरह से अनुचित है।राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए श्री चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक लिखित पत्र भेजा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे इस अधिकारी को सेवा विस्तार और नियमित नियुक्ति देने के किसी भी कदम को तुरंत वापस लें।

श्री चौहान ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित जनहित याचिका (तिलक राज बनाम राज्य सरकार) का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने 'संस्थागत शुचिता' से जुड़े मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए गत 19 मई को राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी किए हैं।

माकपा नेता ने दावा किया कि इस याचिका में अधिकारी के खिलाफ तीन लंबित प्राथमिकी और दो आपराधिक संदर्भों का उल्लेख है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे में उन्हें शीर्ष प्रशासनिक पद पर नियुक्त करने से शासन में जनता का विश्वास और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर बुरा असर पड़ेगा।

श्री चौहान ने कहा कि मुख्य सचिव का पद 'बेदाग छवि और उच्च नैतिक मानकों' वाले अधिकारी की मांग करता है, जबकि इस अधिकारी के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही और सतर्कता से जुड़े आरोपों की जांच अभी भी जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी का नाम चेस्टर हिल्स में कथित बेनामी भूमि सौदों के अलावा 'एचपीपीटीसीएल' द्वारा की गई खरीद और बिजली पारेषण परियोजनाओं में कथित गड़बड़ियों से जुड़े विवादों में भी सामने आ चुका है।

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