भोपाल , फरवरी 18 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मध्यप्रदेश सरकार के बजट को कर्ज पर आधारित और प्रदेश को आर्थिक संकट की ओर ले जाने वाला बताया है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने जारी बयान में कहा कि जिस सरकार ने वार्षिक बजट पेश करने से एक दिन पहले ही 19,287 करोड़ रुपये का तीसरा अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया हो और बजट सत्र प्रारंभ होने से ठीक पहले 5,700 करोड़ रुपये का कर्ज लिया हो, उसके वार्षिक बजट के औचित्य पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 15 फरवरी तक वित्तीय वर्ष के 321 दिनों में सरकार 17 बार कर्ज ले चुकी है। औसतन हर 19 दिन में कर्ज लेने की स्थिति बताती है कि सरकार बिना उधारी के एक माह भी संचालन करने में सक्षम नहीं है। ऐसी परिस्थिति में बजट प्रस्तुत करने के बजाय श्वेतपत्र जारी कर प्रदेश की वास्तविक वित्तीय स्थिति जनता और विधानसभा के सामने रखी जानी चाहिए।

माकपा नेता ने कहा कि जब प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ लगभग 5.40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, तब 4.38 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रदेश की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करता है। उनका आरोप है कि बजट में संसाधन जुटाने के लिए पर्यटन स्थलों, होटलों और प्राकृतिक संसाधनों के विनिवेश अथवा हस्तांतरण जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो दीर्घकालीन विकास के बजाय संपत्तियों के क्षरण की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने कहा कि यह बजट किसान, मजदूर, गांव, गरीब, महिला, छात्र और युवा वर्ग की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता और इसे जनविरोधी बजट करार दिया।

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