अगरतला , अगस्त 10 -- त्रिपुरा में मुख्य विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमवार को अपने देशव्यापी 'जेल भरो' आंदोलन के तहत पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) के तहत आने वाली ग्राम समितियों के आगामी चुनावों से ठीक पहले हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर अलोकतांत्रिक तरीके से काम करने और कुछ सत्ता-लोलुप लोगों के हाथों में शासन केंद्रित करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान अगरतला में सैकड़ों समर्थकों को हिरासत में लिया गया। पार्टी अधिकारियों के अनुसार, राज्य के 21 अन्य स्थानों पर भी ऐसी ही सविनय अवज्ञा गतिविधियां हुईं, जिसमें हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के दिग्गज नेता माणिक सरकार ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरकार के प्रति जनता के गुस्से को उजागर किया। उन्होंने समर्थकों को इस भावना का उपयोग करके लोगों के बीच विश्वास पैदा करने और सरकार की विफलताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री सरकार ने प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि वह पूरी तरह से विफल हो गया है और उसे सत्ता से बेदखल कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों और खेतिहर मजदूरों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि ये समूह एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि युवा अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
माकपा नेता ने केंद्र सरकार पर सी2 पचास प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर कृषि उत्पादों के लिए लाभकारी मूल्य प्रदान करने के अपने लिखित वादे को पूरा न करने और झूम खेती करने वालों तथा कृषि मजदूरों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
यह विरोध प्रदर्शन देशभर में हुए बड़े 'जेल भरो' आंदोलन का हिस्सा था। इसमें किसान संगठनों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, युवा और छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया। इसे देश के करीब 1,000 स्थानों पर आयोजित किया गया।
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