नयी दिल्ली , जून 19 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते (एमओयू) का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और क्षेत्र में हालिया संघर्ष से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्थाओं को राहत मिल सकती है।

माकपा पोलित ब्यूरो ने जारी बयान में कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच की सहमति से दुनियाभर के उन लोगों को 'बेहद जरूरी राहत' मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने 'ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली आक्रामकता' के परिणाम भुगते हैं।

पार्टी ने कहा कि इस समझौते के तहत दोनों देश अंतिम समझौते पर पहुंचने तक युद्धविराम बनाये रखने और एक-दूसरे की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बयान में उन प्रावधानों का भी जिक्र किया गया है, जिनके तहत अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले ईरानी जहाजों पर से प्रतिबंध हटायेगा, जबकि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

माकपा के अनुसार, इन कदमों से वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति पर दबाव कम होने की संभावना है। समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आयी गिरावट का हवाला देते हुए पार्टी ने केंद्र सरकार से रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत घटाने का आग्रह किया, ताकि उपभोक्ताओं को ईंधन की कम हुई कीमतों का फायदा मिल सके।

वामपंथी पार्टी ने सरकार से उर्वरकों, विशेषकर यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी मांग की। पार्टी का तर्क है कि क्षेत्र में तनाव कम होने और समुद्री मार्ग आसान होने से उन आपूर्तियों को स्थिर करने में मदद मिलनी चाहिए, जो भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इस समझौते को 'साम्राज्यवादी आक्रामकता' की सीमाओं का संकेत बताते हुए माकपा ने कहा कि ईरान के लोगों ने लगातार बने सैन्य और आर्थिक दबाव का डटकर मुकाबला किया है। बयान में कहा गया है, "ईरान की जनता साम्राज्यवादी साजिशों के आगे झुकी नहीं है, बल्कि उसने अमेरिका-इजरायल के हमलों का डटकर मुकाबला किया है।"पार्टी ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका ईरान से प्रतिबंध हटाने, ईरानी संपत्तियों को बहाल करने और इस संघर्ष से हुए नुकसान का मुआवजा देने के लिये सहमत हो गया है। माकपा ने कहा कि ईरान को इन संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक दिक्कतों को दूर करने और अपने नागरिकों की भलाई के लिये करना चाहिए।

माकपा ने इस समझौते को युद्ध के खिलाफ दुनिया भर में बढ़ते विरोध से भी जोड़ा। पार्टी का तर्क है कि अमेरिका और कई अन्य देशों में हुए प्रदर्शनों ने इस जंग को रोकने का दबाव बनाने में मदद की। पार्टी के अनुसार, ईरान में सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हुए जन-प्रदर्शनों ने ही दुनिया भर की सरकारों को तुरंत युद्ध रोकने का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। पश्चिम एशिया की व्यापक स्थिति पर पार्टी ने इजरायल से लेबनान पर हमले न करने की अपील की और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करने का आग्रह किया।

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