महोबा , अक्टूबर 15 -- उत्तर प्रदेश मे बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन-2.0 योजना के तहत महोबा में प्रस्तावित सन इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण कार्यदायी संस्था की कथित लापरवाही और उदासीनता के चलते निर्धारित गति नहीं पकड़ पा रहा है। करीब 24.98 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की धीमी प्रगति से इसके समय पर पूरा होने को लेकर संशय गहराने लगा है। ऐसे में जिले में पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रचार-प्रसार को नई दिशा देने की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। महोबा मुख्यालय में कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित राजकीय पुरातत्व संग्रहालय के पास चिह्नित 4,219 वर्ग मीटर क्षेत्र में इस केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य जिले के रहलिया गांव में स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर की विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना है। चंदेलकालीन स्थापत्य कला और सूर्य उपासना की प्राचीन परंपरा के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर महोबा की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से पर्यटकों को भगवान सूर्य के धार्मिक, पौराणिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व से आधुनिक तकनीक के जरिए परिचित कराने की योजना है।
जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. चित्रगुप्त श्रीवास्तव ने बताया कि सन इंटरप्रिटेशन सेंटर की डिजाइन भारतीय समय गणना की पारंपरिक अवधारणा 'आठ प्रहर' पर आधारित होगी। इसमें सूर्य की गति, समय की गणना और प्रकृति के साथ मानव जीवन के संबंध को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केंद्र में आधुनिक 3डी डिस्प्ले, इंटरएक्टिव गैलरी और डिजिटल माध्यमों से पर्यटकों को जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है। परिसर में विशाल सूर्य घड़ी तथा सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान सूर्य की प्रतिमा भी प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। परियोजना की थीम 'सूर्य, संस्कृति और सस्टेनेबिलिटी' रखी गई है। इसके तहत सौर ऊर्जा पैनल, वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी पर्यावरण अनुकूल सुविधाओं को भी शामिल करने की योजना है।
सामाजिक कार्यकत्री सरस्वती वर्मा कहती है क़ी बुंदेलखंड का महोबा आल्हा-ऊदल की वीरगाथाओं, चंदेलकालीन मंदिरों, ऐतिहासिक सरोवरों और प्राचीन स्थापत्य के लिए विख्यात है। सन इंटरप्रिटेशन सेंटर के विकसित होने से जिले की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, पर्यटन गाइड सेवाओं, परिवहन, खानपान और अन्य संबंधित व्यवसायों के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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