महोबा , अक्टूबर 18 -- उत्तर प्रदेश मे महोबा जिले क़ी चरखारी रियासत के सुप्रसिद्ध मेला गोवर्धन नाथ से जुड़ी एक ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। तत्कालीन महराज सर मलखान सिंह जूदेव द्वारा मेला मैदान में स्थापित कराई गई राजदरबार कोठी को ध्वस्तीकरण के लिए नीलाम किए जाने का मामला सामने आया है। भवन को ऐतिहासिक और पुरातत्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। धरोहर संरक्षण को लेकर नगरपालिका परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
तत्कालीन रियासत चरखारी के महराज सर मलखान सिंह जूदेव ने वर्ष 1883 में मेला गोवर्धन नाथ के संचालन के दौरान नगर के 108 कृष्ण मंदिरों के रखरखाव तथा मेले की निगरानी के उद्देश्य से मेला मैदान में राजदरबार महल की स्थापना कराई थी। यह भवन मेला संचालन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। चरखारी रियासत के शासकों द्वारा वर्ष 1883 से 1947 तक एक माह क़ी लम्बी अवधि तक चलने वाले कार्तिक मेला गोवर्धन नाथ के दौरान इसका उपयोग किया जाता रहा।
पालिका के पूर्व चेयरमेन अरविन्द सिंह चौहान ने बताया क़ी आजादी के बाद भी चरखारी के इस भवन का महत्व बना रहा। तब हमीरपुर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मेले के दौरान दो दिन तक यहां कलेक्टर का शिविर लगाया जाता था। इस दौरान एक माह तक मेला मजिस्ट्रेट और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) का कैम्प कार्यालय इसी भवन मे संचालित होता था। यहां न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य भी संपादित किए जाते थे। इस लिहाज से यह भवन केवल एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि चरखारी के ऐतिहासिक मेला और प्रशासनिक व्यवस्था की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
श्री चौहान ने बताया क़ी उचित देखरेख और संरक्षण के अभाव में यह ऐतिहासिक भवन धीरे-धीरे जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो गया। अब नगरपालिका परिषद चरखारी द्वारा इसे ध्वस्तीकरण के लिए नीलाम किए जाने की जानकारी से धरोहर संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि ऐतिहासिक महत्व रखने वाले भवन का संरक्षण करने के बजाय उसे ध्वस्त करने की नौबत क्यों आई।
बुंदेलखंड का कश्मीर और मिनी वृंदावन जैसे विभिन्न नाम से सम्बोधित होने वाले चरखारी के मेला मैदान में स्थित प्राचीन रॉयल थिएटर कंपनी हॉल के संरक्षण के लिए विगत समय मे दस करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का बजट स्वीकृत करा कर उसका कायाकल्प किये जाने,सीसी सड़क, इंटरलॉकिंग और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य कराए गए हैं। इसी के तहत कंपनी हॉल के संरक्षण के साथ क्षेत्र की इस ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की उम्मीद मजबूत हुई थी। लेकिन अब ध्वस्तिकरण हेतु नीलामी कराये जाने से लोगो को भारी निराशा हुयी है.नागरिको का कहना है क़ी मेले की स्थापना और संचालन से जुड़ी राजदरबार कोठी का संरक्षण क्षेत्र की विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इस भवन के ऐतिहासिक महत्व, वर्तमान स्थिति और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को रोक संरक्षण की संभावनाओं पर विचार किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां चरखारी के गौरवशाली अतीत से परिचित हो सकें।
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