रांची , अक्टूबर 14 -- झारखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, आदिवासी महिलाओं पर कथित पुलिसिया दमन, नाबालिग आदिवासी बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटनाओं को लेकर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

बुधवार को महेंद्र सिंह भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन की प्रतिनिधियों ने विभिन्न घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। संगठन ने कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नंदिता भट्टाचार्य ने लातेहार जिले के बरियातू थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास और कांस्टेबल मनीष राम पर एक आदिवासी महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार, जातिसूचक गालियां देने, स्तन छूने, उल्टा लटकाकर पिटाई करने और 80 हजार रुपये वसूलने के आरोपों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घटना पांच अक्टूबर 2026 की है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है। उनके अनुसार, यह मामला आदिवासी महिलाओं के साथ कथित पुलिसिया उत्पीड़न की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

नंदिता भट्टाचार्य ने दुमका में आठवीं कक्षा की एक नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि घटना के तीन दिन बाद तक पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, करीब 500 लोगों से पूछताछ के बावजूद केवल एक व्यक्ति को पकड़ा गया था। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और वास्तविक दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।

प्रेस वार्ता में कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार यादव पर एक नाबालिग आदिवासी बच्ची के कथित यौन शोषण के आरोपों का मामला भी उठाया गया। नंदिता भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि घटना सामने आने के 48 घंटे बाद भी सिविल सर्जन को पद से निलंबित नहीं किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि सिविल सर्जन ने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया, जिसके कारण बच्ची ने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया। प्रेस वार्ता में मौजूद कोडरमा की एक नर्स ने कथित तौर पर गवाही देते हुए कहा कि वर्ष 2025 में उस पर नाबालिग बच्ची को अपने कमरे में रखने के लिए दबाव बनाया गया था, ताकि सिविल सर्जन वहां आ-जा सकें। नर्स के अनुसार, ऐसा करने से इनकार करने पर उसकी नौकरी छीन ली गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

झारखंड जन अधिकार महासभा की प्रतिनिधि अपूर्वा ने कहा कि जनता ने सरकार को महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चुना है। उन्होंने मांग की कि यदि पुलिस अधिकारी या प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्ति किसी अपराध में आरोपी हैं, तो उनके खिलाफ भी सामान्य नागरिकों की तरह कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।

उन्होंने पुलिस प्रशासन से महिलाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लेने और पूरे राज्य में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की गीत तिर्की, झारखंड जन अधिकार महासभा की अपूर्वा और कोडरमा की एक नर्स मौजूद थीं।

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