कोटा , जुलाई 30 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने महिला स्वास्थ्य की दिशा में समग्र दृष्टिकोण से कार्य करने की आवश्यकता बताया है और कहा है कि महिलाएं सशक्त होंगी तो समाज विकसित होगा और राष्ट्र भी सशक्त बनेगा।
श्री बागडे गुरुवार को कोटा के सिआम ऑडिटोरियम में कृषि विश्वविद्यालय कोटा एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नयी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'स्वस्थ एवं शिक्षित महिला सशक्त राष्ट्र' विषेयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हमें उन्हें शिक्षा से जोड़ना होगा। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास करने के लिए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की सराहना की और महिला स्वास्थ्य की दिशा में समग्र दृष्टिकोण से कार्य करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य एवं उनकी शिक्षा पर आधारित चर्चा समाज एवं राष्ट्र के विकास में उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि पहले नौकरियों में महिलाओं की संख्या काफी कम होती थी लेकिन आज विभिन्न कार्यालयों में नौकरीपेशा महिलाओं का प्रतिशत अच्छा है। विभिन्न परीक्षा परिणामों में छात्राएं बाजी मार लेती हैं और उनका उत्तीर्ण प्रतिशत भी छात्रों के मुकाबले अधिक रहता है।
उन्होंने इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति एवं इन्दौर की कमला भागवत का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने शिक्षा ग्रहण की और समाज में नाम रोशन किया। श्री बागडे ने स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों के शिक्षकों का आह्वान किया कि बच्चों के बुद्धि कौशल में वृद्धि करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास करें। कक्षा में जाने से पहले शिक्षक स्वयं अध्ययन कर अपना ज्ञान बढ़ाएं और वह ज्ञान बच्चों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी आत्मविश्वास को बढ़ाये एवं अपनी क्षमताओं का विकास कर जीवन में आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिभा की आज विश्व में अलग पहचान है। अमेरिका एवं जर्मनी जैसे देश हमारे युवाओं को पढ़ाई के साथ जॉब का भी ऑफर दे रहे हैं। बचपन से ही बौद्धिक क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देकर हम हमारे युवाओं की काबिलियत का लोहा पूरे विश्व में मनवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवारों में संतुलन कायम करने, सामाजिक सरोकारों को निभाने के साथ ही रिश्तों को भी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। वे सच्चे अर्थों में भारतीय संस्कृति की वाहक हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं का आह्वान किया कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ अनूप कोठारी ने कहा कि महिला स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता में होना चाहिए क्योंकि महिला स्वस्थ होगी तो पूरा परिवार स्वस्थ होगा। साथ ही, महिला सशक्त होगी तो परिवार भी सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि कई बार परिवार का ध्यान रखते-रखते अपने स्वयं की स्वास्थ्य की चिंता नहीं करती और वे व्याधियों की जकड़ में आ जाती हैं, ऐसे में स्वस्थ खानपान और स्वच्छता पर ध्यान देते हुए उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी चर्चा की जानी चाहिए।
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