जयपुर , जुलाई 24 -- राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) ने शुक्रवार को यहां महिला स्वयं सहायता समूहों को निर्यात से जोड़ने के लिए 'स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए निर्यात संवर्धन विषयक क्षमता निर्माण कार्यशाला' का आयोजन किया।

ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य एसएचजी की महिला शिल्पकारों एवं ग्रामीण उद्यमियों को निर्यात की संभावनाओं, वैश्विक बाजारों की आवश्यकताओं तथा निर्यात प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी प्रदान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के लिए सक्षम बनाना था। राजस्थान के स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद गुणवत्ता और विविधता के मामले में किसी से कम नहीं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें सेवा एवं निर्यात क्षेत्र से प्रभावी रूप से जोड़ा जाये, ताकि ग्रामीण महिलाओं की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि ओएसएफ, एसवीईपी और एमईडी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला उद्यमिता को नयी दिशा मिल रही है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से मार्केटिंग और ब्रांडिंग की समझ विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि सही मूल्य निर्धारण और बाजार की मांग को समझना सफलता की कुंजी है।

उन्होंने 'राजसखी' ब्रांड को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए कहा कि इस ब्रांड के अंतर्गत तैयार उत्पाद प्रीमियम तथा बड़े उपभोक्ता वर्ग दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाओं से आग्रह किया कि वे स्वयं सहायता समूहों की महिला शिल्पकारों का केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर निरंतर मार्गदर्शन भी करें।

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