भुवनेश्वर , अप्रैल 30 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को कहा कि महिलाओं का असली सशक्तिकरण सिर्फ़ आर्थिक आज़ादी तक ही सीमित नहीं हो सकता, बल्कि समाज में उन्हें उनका सही स्थान दिलाने के लिए इसे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सभी क्षेत्रों तक फैलाना ज़रूरी है।
भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी पर ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान श्री माझी ने कहा कि राजनीतिक दल दशकों से महिलाओं के सशक्तिकरण पर चर्चा करते आ रहे हैं, लेकिन इस अवधारणा की अक्सर बहुत संकीर्ण व्याख्या की गयी है। उन्होंने कहा कि कई लोगों का मानना है कि महिलाएं सिर्फ़ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी ) और सीमित आर्थिक मदद से ही सशक्त हो जाती हैं। उन्होंने इस सोच को अपर्याप्त बताया। सच्चा सशक्तिकरण तो महिलाओं को खुद के लिए, अपने परिवार के लिए और पूरे समाज के लिए खुद फ़ैसले लेने में सक्षम बनाने में निहित है।
विधानसभा के विशेष सत्र के व्यापक उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चर्चा केवल 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण विशेष रूप से राजनीतिक सशक्तिकरण पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श करना है। उन्होंने कहा कि यद्यपि संविधान बनने के बाद से पिछले 75 वर्षों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी देश की आधी आबादी अभी भी अपनी उचित स्थिति से वंचित महसूस करती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि भारत में महिलाओं ने दशकों से हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह का उदाहरण दिया, जो 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के प्रमुख चेहरों के रूप में उभरीं और आधुनिक भारत की नारी शक्ति का प्रतीक बनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि महिलाओं को समान अवसर और समान मंच प्रदान किया जाए, तो वे आज असंभव को भी संभव कर दिखाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा, "पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचनाएँ लगातार ऐसी बाधाएँ खड़ी करती हैं, जो महिलाओं को ये अवसर प्राप्त करने से रोकती हैं।
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का ज़िक्र करते हुए श्री मांझी ने कहा कि पिछड़े वर्गों या मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की माँगें अक्सर महिलाओं को न्याय दिलाने में देरी करने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल की गयी हैं। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि 1984 में संसद में लोकसभा की 414 और राज्यसभा की 159 सीटों के साथ भारी बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस ने इतने महत्त्वपूर्ण कानून को पारित करने में विफल क्यों रही?उन्होंने बीजू जनता दल (बीजद ) की आलोचना करते हुए कहा कि जहाँ एक ओर यह पार्टी अक्सर पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का श्रेय लेती है, वहीं संसद और विधानसभाओं में आरक्षण की बात होने पर यह महिला-विरोधी रुख अपना लेती है।उनका कहना है कि इस तरह का विरोध राजनीतिक स्वार्थ के कारण होता है, क्योंकि उच्च विधायी निकायों में आरक्षण लागू होने से मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। महिलाओं की राजनीतिक प्रगति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योगदान की सराहना करते हुए श्री माझी ने कहा कि स्वतंत्र भारत में महिलाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए ऐसे बेमिसाल प्रयास पहले कभी नहीं देखे गए। उन्होंने ओडिशा की बेटी द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रपति पद तक पहुँचने को एक ऐतिहासिक उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मोदी सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई बड़े और बदलाव लाने वाले कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल ऋणों में से 69 प्रतिशत महिलाओं को मिले हैं, जबकि 'स्टैंड-अप इंडिया' योजना के 84 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं ही हैं। इसी तरह, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत कुल घरों में से 72 प्रतिशत महिलाओं के नाम पर पंजीकृत किए गए हैं, जिससे उनके संपत्ति अधिकारों को मजबूती मिली है।
उन्होंने बताया कि भारत में अब एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) विषयों में स्नातक करने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत हो गई है। वहीं प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में 57 से 60 प्रतिशत और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 45 प्रतिशत शिक्षक महिलाएं ही हैं। ओडिशा की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालते हुए माझी ने 'सुभद्रा योजना' को एक क्रांतिकारी कार्यक्रम बताया, जिसका उद्देश्य राज्य की एक करोड़ से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा ने अपनी 'ममता योजना' को केंद्र सरकार की 'पीएम मातृ वंदना योजना' के साथ एकीकृत कर दिया है, क्योंकि राज्य सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य को ही एक स्वस्थ समाज की नींव मानती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवल वर्ष 2025-26 के दौरान ही इन योजनाओं के तहत लगभग 4.57 लाख महिलाओं को करीब 496.37 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि 'पोषण अभियान' के तहत, 35 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के वास्ते मार्च 2026 तक कुल 144 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
श्री माझी ने महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ओडिशा द्वारा किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया और बताया कि राज्य में जमीनी स्तर पर 'नारी अदालतों' की स्थापना की गई है। ओडिशा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे एसएचजी (स्वयं सहायता समूहों) की भूमिका पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि 2025-26 में राज्य ने 3.8 लाख SHGs को ब्याज के तौर पर 724.32 करोड़ रुपये वापस किए, और यह भरोसा दिलाया कि 10 लाख रुपये तक के बैंक कर्ज़ पर ब्याज की वापसी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2029 के आम चुनावों तक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने के लिए कदम उठाए हैं, जबकि उन्होंने विपक्ष पर इस कदम में रुकावट डालने का आरोप लगाया। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 के बाद से श्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण मिलेगा।
श्री माझी ने आखिर में विधानसभा के सदस्यों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस विशेष सत्र के सार्थक और रचनात्मक नतीजे निकलें, ताकि पूरे देश की महिलाओं को भारतीय लोकतंत्र में उनके लंबे समय से प्रतीक्षित उचित अधिकार मिल सकें।
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