मुजफ्फरपुर , मार्च 26 -- बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतेश कुमार मिश्रा ने गुरुवार को बताया कि महिला थाना में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। श्री मिश्रा ने आज महिला थाना का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने थाना परिसर के सिरिस्ता, लंबित कांडों की फाइलों तथा अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान थाने की व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड के रख-रखाव को बारीकी से परखा गया।
एसएसपी ने जांच के बाद महिला थाना की कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि सभी दस्तावेज और व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गई हैं।
श्री मिश्रा ने बताया कि मुख्यालय से प्राप्त निर्देशों के आलोक में अब महिला थाना परिसर में ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह विशेष यूनिट उन बच्चियों और युवतियों की बरामदगी पर विशेष ध्यान देगी, जो लंबे समय से लापता हैं या जिनका अपहरण हो चुका है और अब तक उनकी बरामदगी नहीं हो पाई है।
एसएसपी ने बताया कि इस नई यूनिट की कमान विशेष अपराध शाखा के पुलिसउपाधीक्षक (डीएसपी)को सौंपी गई है, जो इसके कार्यों की निगरानी और अनुश्रवण करेंगे। यह टीम केवल लापता बच्चों की तलाश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विशेष अभियान चलाकर अपहृत बच्चियों की समयबद्ध बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का भी उपयोग करेगी। इससे जिले में मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
श्री मिश्रा ने बताया कि लापता बच्चियों की तलाश के अलावा यह यूनिट महिला अपराध से जुड़े अन्य गंभीर मामलों पर भी पैनी नजर रखेगी। विशेष रूप से बच्चों का लैंगिक अपराध से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के लंबित मामलों तथा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों के त्वरित निष्पादन की जिम्मेदारी भी इसी टीम को दी जाएगी।
एसएसपी ने विश्वास जताया कि इस समर्पित यूनिट के सक्रिय होने से महिला सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी तथा लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। एसएसपी के इस निरीक्षण और नई यूनिट की स्थापना से महिला थाना की कार्यशैली में और अधिक तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। जिन अभिभावकों की बच्चियां लंबे समय से लापता हैं, उनके लिए यह पहल नई उम्मीद लेकर आई है।
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