दरभंगा , अगस्त 24 -- बिहार में दरभंगा जिले की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) (एससी/एसटी अदालत) की विशेष अदालत ने महिला की हत्या के मामले में दोषी एक युवक को आजीवन सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।एससी/एसटी अदालत के विशेष लोक अभियोजक संजीव कुमार कुंवर ने सोमवार को यहां बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) के विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार ठाकुर की अदालत ने जाले थाना क्षेत्र के काजी बहेड़ा गांव निवासी मो. शहनवाज को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(5) के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।उन्होंने बताया कि 25 अगस्त 2024 को तड़के करीब चार बजे काजी बहेड़ा गांव में अपने घर के समीप स्थित बांसबाड़ी में सुनीता देवी की हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में मृतका की पतोहू अहिल्या देवी के आवेदन पर जाले थाना में अज्ञात के विरुद्ध कांड संख्या 162/24 दर्ज किया गया था।

अनुसंधान के दौरान पुलिस ने 28 अगस्त 2024 को लहेरियासराय रेलवे स्टेशन से संदिग्ध मो. शहनवाज को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने रस्सी से गला घोंटकर सुनीता देवी की हत्या करने की बात स्वीकार की। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त रस्सी भी बरामद की।

श्री कुंवर ने बताया कि अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने शहनवाज के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले का विचारण एससी/एसटी केस संख्या 02/25 के तहत शुरू हुआ। न्यायालय ने 27 फरवरी 2025 को बीएनएस की धारा 103 तथा एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(5) के तहत अभियुक्त के विरुद्ध आरोप गठित किया।

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अनुसंधानकर्ता, चिकित्सक समेत कुल सात गवाहों की गवाही कराई गई। अदालत ने आरोप गठन के करीब एक वर्ष पांच माह 21 दिनों के भीतर मामले की सुनवाई पूरी करते हुए गत 18 अगस्त को शहनवाज को उक्त धाराओं में दोषी करार दिया था।

सोमवार को सजा के बिंदु पर अभियोजन एवं बचाव पक्ष की बहस सुनने तथा अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परिशीलन करने के बाद अदालत ने दोषी मो. शहनवाज को आजीवन सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि दोषी शहनवाज 29 अगस्त 2024 से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

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