भोपाल , अक्टूबर 15 -- खेती में महिलाओं के योगदान को किसान के रूप में पहचान दिलाने, भूमि एवं संपत्ति पर उनके अधिकार सुनिश्चित करने और कृषि संबंधी निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से भोपाल में 14 और 15 अक्टूबर को दो दिवसीय महिला किसान दिवस समारोह आयोजित किया गया। इसमें मध्यप्रदेश के 31 जिलों से लगभग 400 महिला किसानों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।

स्वर्ण जयंती सभागार, प्रशासन अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती गठबंधन, मध्यप्रदेश सस्टेनेबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव एसोसिएशन, महिला किसान अधिकार मंच, मध्यप्रदेश एग्रोइकोलॉजी कोएलिशन और प्रदान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। 'हमारी पहचान, हम हैं किसान' विषय पर केंद्रित आयोजन में खेती, उद्यमिता, सामूहिक संगठन, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में प्रदान की अर्चना सिंह ने आयोजन की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। विभिन्न जिलों से आई महिला किसान नेताओं ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। महिला किसान अधिकार मंच की माधुरी खड़से ने महिला किसानों को संगठित करने के अनुभव बताए, जबकि पद्मश्री जनक पलटा मैकगिलिगन ने आदिवासी महिलाओं के कौशल विकास और टिकाऊ आजीविका के उदाहरण प्रस्तुत किए।

चर्चा में महिला किसानों की आय, उद्यमिता, संगठनों को सहयोग, नेतृत्व क्षमता और सरकारी योजनाओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। भूमि एवं संपत्ति पर महिलाओं के अधिकार, डिजिटल साक्षरता, तकनीकी जानकारी और संसाधनों की उपलब्धता को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। महिला किसानों के मुद्दों को राज्य स्तर पर संबंधित विभागों और नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने के लिए साझा मंच बनाने की आवश्यकता भी जताई गई।

15 अक्टूबर को 'महिला किसान भागीदारी से पहचान, पहचान से आर्थिक सशक्तीकरण तक' विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दीपिका अग्रहार मुरुगकर, डॉ. मनोज जैन, श्वेता लांबा, नेहा चतुर्वेदी, चिंतन मेघवंशी और कमल जायसवाल ने भाग लिया। चर्चा का संचालन प्रतिभा श्रीवास्तव ने किया। वक्ताओं ने खेती की आय पर महिलाओं के निर्णय लेने के अधिकार, ग्रेडिंग, आधुनिक मशीनों और प्रशिक्षण के माध्यम से आय तथा पोषण बढ़ाने की जरूरत बताई।

राज्य सांख्यिकी आयोग के उप निदेशक नरेश बहल ने महिला किसानों के आत्मविश्वास और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग की सराहना करते हुए उनके लिए बुनियादी सुविधाएं, सरकारी सहयोग और अपनी समस्याएं रखने के अवसर सुनिश्चित करने पर जोर दिया। विभिन्न विभागों और संस्थाओं के अधिकारियों ने भी महिला किसानों को संबंधित योजनाओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में 'हम हैं किसान, हमारी कहानी हमारी जुबानी' पुस्तक का विमोचन किया गया। इसमें महिला किसानों के संघर्ष, उपलब्धियों और सफलता की कहानियां संकलित हैं। उनकी कहानियों को साझा करने के लिए 'हम हैं किसान' सोशल मीडिया मंच भी शुरू किया गया। ग्रीन चक्र फाउंडेशन और मध्यप्रदेश एग्रोइकोलॉजी प्लेटफॉर्म की ओर से मध्यप्रदेश महिला बीआरसी उद्यमी पुरस्कार 2026 के तहत भूरी अहिरवार को प्रथम और सोनकच्छ की हीरामणि देवी को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

आयोजकों के अनुसार, 'हमारी पहचान, हम हैं किसान' पहल का उद्देश्य महिलाओं को किसान के रूप में पहचान दिलाना तथा कृषि, उद्यमिता और सार्वजनिक निर्णय प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी और आवाज को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। इस पहल के तहत जिलों और विभिन्न संस्थाओं में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं तथा आगे और आयोजन प्रस्तावित हैं।

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