श्रीनगर , अप्रैल 16 -- जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कृषि में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका पर बल देते हुए गुरुवार को कहा कि उनके योगदान के बिना, "हर थाली खाली रहेगी, जिससे मानवता भूखी रह जाएगी।"श्री सिन्हा ने यहां इफको की ओर से आयोजित महिला किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और ग्रामीण समृद्धि में महिला किसानों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला तथा इस क्षेत्र में उनके नेतृत्व को मजबूत करने के लिए अधिक मान्यता, संसाधन और सशक्तिकरण की मांग की। उन्होंने कहा, "महिलाएं दुनिया को संभालती हैं, अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में अधिक मेहनत करती हैं और उनकी ताकत खाद्य सुरक्षा का आधार है, जो परिवारों एवं समाज के लिए हर क्षेत्र में समृद्धि के बीज बोती है।"उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं का सशक्तिकरण सभी क्षेत्रों में सर्वोच्च प्राथमिकता है। उपराज्यपाल ने कहा कि वैश्विक खाद्य प्रणाली महिलाओं के श्रम पर टिकी है, फिर भी यह उन्हें समृद्धि से वंचित रखती है। उन्होंने सभी सहकारी समितियों और सरकारी हितधारकों से आग्रह किया कि वे यह प्रश्न पूछें कि महिला किसानों के जीवन में कौन सी चुनौती या बाधा को तुरंत दूर किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि इन्हें एक-एक करके दूर करके हम उनके नेतृत्व का सम्मान कर सकते हैं और प्रत्यक्ष बाजार पहुंच के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं।

उपराज्यपाल ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में महिला किसानों के योगदान, महिला कृषि उद्यमियों के प्रयासों पर प्रकाश डाला और उनके नेतृत्व में कृषि क्षेत्र के विकास पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2026 को महिला किसानों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित करके उचित कार्य किया है।

उपराज्यपाल ने कहा, "मैं अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 को एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखता हूं, जो कृषि के विकास में महिलाओं को केवल श्रमिक नहीं बल्कि सृजनकर्ता के रूप में स्थापित करता है। हर योजना में महिला किसानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुझे विश्वास है कि 2026 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका को ईमानदारी से मान्यता दी जाएगी और उनकी आकांक्षाओं को पूरा किया जाएगा।"उन्होंने प्रौद्योगिकी क्षेत्र के नवप्रवर्तकों से महिला किसानों के लिए तकनीकी उपकरणों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और दुग्ध उत्पादन विभागों को महिला किसानों के लिए संसाधन आवंटित करना चाहिए जबकि वित्तीय संस्थानों को ऐसे ऋण उत्पाद तैयार करने चाहिए जिनसे भूमिहीन महिला किसान अपने नाम पर ऋण प्राप्त कर सकें।

उपराज्यपाल ने कहा, "हमें जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के संकल्प के साथ समाज को पुनर्जीवित करना होगा ताकि महिलाओं की शक्ति इसे रूपांतरित कर सके। 2020 से महिला सशक्तिकरण में हुई महत्वपूर्ण प्रगति ने राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम की है और हमारी महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना इसकी सफलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।"उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे महिला किसानों और उद्यमियों को मान्यता, संसाधन और अपनी शर्तों पर काम करने की स्वतंत्रता प्रदान करें। उन्होंने कहा कि सशक्त महिला किसान जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन लाने वाली प्रमुख महिलाएं हैं, जो गुणवत्तापूर्ण बीजों, डिजिटल उपकरणों और सहकारी समितियों से प्राप्त बाजार संपर्कों के माध्यम से मजबूत कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) के माध्यम से जम्मू-कश्मीर उच्च उत्पादन, आय और सतत कृषि के लिए समग्र, प्रौद्योगिकी-आधारित और किसान-केंद्रित परिवर्तन को बढ़ावा दे रहा है। इस कार्यक्रम में 14,782 महिला किसानों का पंजीकरण हो चुका है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 जून, 2024 को जलवायु-अनुकूल, बाजार-उन्मुख उत्पादन; कृषि-अर्थव्यवस्था पारिस्थितिकी तंत्र; क्षेत्रीय विकास; और कमजोर समूहों, महिलाओं और युवाओं के लिए सहायता को लक्षित करते हुए जेकेसीआईपी का शुभारंभ किया, जिसमें 5,248 महिला किसानों को पंजीकृत किया गया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में 90,000 से अधिक महिला लाभार्थी हैं। प्राकृतिक खेती और केंद्र सरकार की योजनाओं में 8,000 से अधिक महिला किसान पंजीकृत हैं; बागवानी में 4,472; रेशम उत्पादन में 128; एसकेयूएएसटी योजनाओं में 144,000 से अधिक; डेयरी में 27,500; और भेड़ पालन और मत्स्य पालन में 16,000 से अधिक महिलाएं पंजीकृत हैं। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में लगभग 3,11,000 महिलाएं पंजीकृत हैं।

उपराज्यपाल ने कहा, "मैं लाखों अपंजीकृत महिला किसानों को पहचानता हूं; मैं उनसे केंद्र सरकार की योजनाओं में शामिल होने का आग्रह करता हूं। मुझे जम्मू कश्मीर के स्वयं सहायता समूहों, महिला नेतृत्व वाले कृषि संगठनों और मशरूम, बागवानी, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण और डेयरी में कौशल कार्यक्रमों पर गर्व है, जो ग्रामीण महिलाओं को किसान, कृषि उद्यमी और निर्णयकर्ता के रूप में सशक्त बना रहे हैं। जब महिलाएं कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में उत्पादन संसाधनों, इनपुट और सेवाओं पर नियंत्रण रखती हैं, तो वे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।"उन्होंने इफको से जम्मू-कश्मीर में किसान प्रशिक्षण केंद्र, बहु-सुविधा वाला किसान सेवा केंद्र, भेड़ उत्पादन इकाई स्थापित करने और स्थानीय किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए मोबाइल मृदा परीक्षण मशीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

उपराज्यपाल ने यह भी घोषणा की कि कश्मीर डिवीजन के लिए 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर' जन आंदोलन तीन मई, 2026 को श्रीनगर से शुरू किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं, युवाओं और समाज के सभी वर्गों से केंद्र शासित प्रदेश से नशीले पदार्थों के खतरे को खत्म करने के लिए इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उपराज्यपाल ने महिला कृषि उद्यमियों को सम्मानित किया और आईएफएफसीओ और विभिन्न कृषि उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी दौरा किया।

कार्यक्रम में कृषि उत्पादन, ग्रामीण विकास और पंचायती राज एवं सहकारिता मंत्री जाविद अहमद डार; इफको के अध्यक्ष दिलीप सिंघानी; इफको के प्रबंध निदेशक के.जे. पटेल; इफको के विपणन निदेशक योगेंद्र कुमार; कश्मीर के कृषि निदेशक सरताज अहमद शाह; महिला किसान और कृषि उद्यमी, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य और महिला प्रतिनिधि मौजूद रही।

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