मुंबई , अप्रैल 20 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को उम्मीद जतायी कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला संवैधानिक संशोधन 2029 के आम चुनावों से पहले अनुमोदित और लागू हो जाएगा।

श्री फडणवीस ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में महिला शक्ति विपक्षी दलों पर दबाव डालने में निर्णायक भूमिका निभाएगी ताकि वे इसके पारित होने का समर्थन करें जो वर्तमान में विधेयक का विरोध कर रहे हैं। इस विधेयक को पारित कराने के लिए माहौल बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने सहयोगियों के साथ मिलकर महाराष्ट्र में महिलाओं को लामबंद करने की योजना बना रही है। इस प्रयास के अंतर्गत एक करोड़ महिलाओं द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन विधेयक को मंजूरी देने की मांग के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

श्री फडणवीस ने कहा कि आरक्षण लागू होने तक पार्टी चुप नहीं बैठेगी। विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनका रुख ऐतिहासिक रूप से महिला-विरोधी रहा है। उन्होंने उन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी असलियत जनता, विशेषकर महिला मतदाताओं के सामने उजागर हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि 2023 में सभी विपक्षी दलों ने शुरू में महिला आरक्षण का समर्थन किया था इस सहमति के साथ कि जनगणना और निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन पूरा होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना में देरी हुई जिसके कारण केंद्र सरकार ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर विधेयक पेश किया।

श्री फडणवीस ने विपक्ष द्वारा पहले समर्थन देने के बावजूद विधेयक का विरोध करने की कड़ी आलोचना करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। विधेयक का विरोध और अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन का विरोध न केवल महिलाओं को नुकसान पहुंचाया है बल्कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को भी प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा कि अगर यह संशोधन पहले लागू किया गया होता तो संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 30 प्रतिशत बढ़ जाता जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व क्रमशः 13 प्रतिशत और सात प्रतिशत बढ़ जाता।

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