नयी दिल्ली , अप्रैल 18 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है जिन राजनीतिक दलों ने लोकसभा में नारी वंदन संशोधन अधिनियम को पारित नही होने दिया और महिलाओं को उनका अधिकार देने से रोकने का काम किया उन दलों को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन दलों ने यह अपराध किया है, उन्हें देश की महिलाएं कभी बर्दाश्त नहीं करेंगी और जब भी इन दलों के वह देखेंगी तो इसकी कसक उनके हृदय पटल पर रहेगी।
श्री मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि विपक्षी दलों ने महिलाओं का जो अपमान किया है उसकी सजा देश की नारी जरूर देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के साथ न्याय नहीं करने का पाप किया है। उन्होंने कहा की नारी के दशकों से लटके हक को 2029 से दिया जाना था लेकिन उन्हें नए अवसर नहीं दिया गया और महिलाओं के उड़ान भरने में बढ़ाएं पैदा की गई।
उनका कहना था कि देश की नारी को ईमानदारी के साथ न्याय देने का एक पवित्र कार्य था और इसमें देश के हर राज्य में महिलाओं को शक्ति की आवाज देने का प्रयास था। उनकी सरकार ने समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी लेकिन कांग्रेस तथा उसकी सहयोगियों ने देश के सामने 'भ्रूण हत्या' करने का काम संसद में किया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ ही समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और टीएमसी जैसे दल इस अपराध के आरोपी हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस ने हर बार महिलाओं को आरक्षण देने के काम में रोड़े अटकाए हैं और इस बार भी कांग्रेस तथा उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नये झूठ का सहारा लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस तथा उनका साथ देने वाले दलों ने देश को गुमराह करने का काम किया है और इससे उसका मुखौटा उतर गया है। कांग्रेस पहले ही देश की ज्यादातर हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है और इस नारी शक्ति विधेयक का विरोध कर उसने अपनी रही सही साख को भी खो दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा की नारी वंदन विधेयक को उन सभी दलों ने पारित नहीं होने दिया है जो परिवारवाद को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना था कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता तो इनके परिवार वाद को बढ़ाने की राजनीति को इससे बड़ा खतरा पैदा हो सकता था। उन्होंने कहा कि देश की नारी कांग्रेस को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा विभाजन की राजनीति को बढ़ावा दिया है और इसी का परिणाम है कि वह परिसीमन को लेकर के गलत बयानबाजी कर प्रचार करती रही है।
उन्होंने कहा कि यह बिल सभी राज्यों के लिए एक अवसर था और यदि परिसीमन को लागू करने वाला यह विधेयक पारित होता तो सभी राज्यों में जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ती और तमिलनाडु तथा अन्य सभी राज्यों में जनता की आवाज ज्यादा संख्या में विधानसभा और लोकसभा में पहुंचती लेकिन तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी आदि सब इसमें चूक गये।
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