लखनऊ , अप्रैल 30 -- उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों का एक दिवसीय विशेष सत्र गुरुवार को महिला आरक्षण मुद्दे पर जोरदार बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच निंदा प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया । सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उनके कार्यकाल को महिला विरोधी बताया, वहीं विपक्ष ने सरकार की मंशा और सीमित चर्चा समय पर सवाल खड़े किए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) को जब-जब सत्ता मिली, तब प्रदेश में बर्बर और क्रूर घटनाएं सामने आईं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस समय "देख सपाई, बिटिया घबराई" जैसा नारा प्रचलित हो गया था।

उन्होंने कहा कि यह विशेष सत्र सपा और इंडी गठबंधन के कथित महिला विरोधी आचरण के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने के उद्देश्य से बुलाया गया है।

विधानसभा में नेता माता प्रसाद पांडेय द्वारा आरक्षण विरोध के आरोप पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा कभी भी अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के आरक्षण के खिलाफ नहीं रही, लेकिन मजहबी आधार पर आरक्षण का लगातार विरोध करती रही है। उन्होंने 1947 के विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को ऐसी परिस्थितियों से बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होते थे, बल्कि "डंडे मिलते थे", जबकि वर्तमान में करोड़ों महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से चर्चा में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए विपक्ष से पूछा कि उन्होंने नारी शक्ति वंदन विधेयक का विरोध क्यों किया।

वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले महिला आरक्षण का विरोध किया, वे आज समर्थन की बात कर रहे हैं। उन्होंने 2010 में संसद में बिल फाड़े जाने का जिक्र करते हुए विपक्ष की नीयत पर सवाल उठाए।

वहीं, विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने महिला आरक्षण के प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर महिलाओं की वास्तविक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने "प्रधानपति" की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि वास्तविक अधिकार अभी भी पुरुषों के हाथ में हैं।

कांग्रेस ने विशेष सत्र की अवधि को लेकर आपत्ति जताई। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर केवल पांच घंटे की चर्चा पर्याप्त नहीं है और समय बढ़ाया जाना चाहिए ताकि सभी पक्ष अपनी बात विस्तार से रख सकें।

विधायक केतकी सिंह ने सपा शासनकाल में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस दौरान बड़ी संख्या में अपराधियों पर कार्रवाई नहीं हुई और महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने बदायूं गैंगरेप कांड का भी उल्लेख किया।

हाथरस से विधायक अंजुला महौर ने महिला सशक्तिकरण को राष्ट्र सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने एंटी रोमियो स्क्वायड का उदाहरण दिया।

मंत्री बेबी रानी मौर्य ने भी महिला आरक्षण के समर्थन में बोलते हुए कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं और सरकार की योजनाएं हर वर्ग तक पहुंच रही हैं।

सपा से बागी विधायक पूजा पाल ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब महिलाओं को अधिकार देने की बात आती है, तो विरोध किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल नहीं चाहते कि महिलाएं संसद में अपनी आवाज बुलंद करें।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित