रांची , अप्रैल 17 -- झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि "महिला सशक्तिकरण के नाम पर देश की जनता को केवल भ्रमित किया जा रहा है, जबकि हकीकत में महिलाओं को उनका न्यायपूर्ण अधिकार देने की कोई ठोस मंशा दिखाई नहीं देती।"डॉ. अंसारी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती, तो महिला आरक्षण विधेयक को बिना किसी देरी और शर्तों के लागू किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि "प्रधानमंत्री और उनकी सरकार महिला अधिकारों पर सिर्फ खोखली बयानबाजी कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं दिखती।" उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से देश की महिलाओं से माफी मांगने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की।
डॉ. अंसारी ने परिसीमन और जनगणना के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि "2026 की जनगणना के बिना परिसीमन लागू करने की कोशिश लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।" उन्होंने कहा कि अद्यतन आंकड़ों के बिना की गई कोई भी प्रक्रिया समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकती है। "लोकतंत्र में हर निर्णय पारदर्शिता और संतुलन के साथ होना चाहिए, न कि जल्दबाजी में," उन्होंने जोड़ा।
डॉ. अंसारी ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण केवल सामान्य वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को भी समान और सुनिश्चित भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "सामाजिक न्याय के बिना कोई भी आरक्षण अधूरा है। यदि वंचित वर्गों की महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया गया, तो यह आरक्षण नहीं, बल्कि केवल दिखावा बनकर रह जाएगा।"डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड सरकार महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर पूरी मजबूती से खड़ी है और राज्य में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। "महिलाओं को सिर्फ सम्मान की प्रतीक बनाकर नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्तियों में उनकी वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। अंत में डॉ. अंसारी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि महिला आरक्षण विधेयक को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय इसे व्यापक सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से लागू किया जाए, ताकि देश की हर महिला को उसका संवैधानिक और समान अधिकार मिल सके।
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