चेन्नई , जून 29 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के नेतृत्व में किये गये एक अध्ययन में यह बात उभरकर सामने आई है कि भारत में लैंगिक उत्पीडन की शिकार महिलाओं को न्याय दिलाने में महिला पुलिस अधिकारियों की भूमिका अहम है।
अध्ययन में पाया गया है कि पुलिस कार्य में महिलाओं की अधिक भागीदारी से एक ओर जहां पीड़ितों का भरोसा बढ़ता है, तो वहीं दूसरी ओर अपराध की रिपोर्टिंग में भी सुधार होता है। इसमें संस्थागत सुधारों और संवेदनशीलता की जरूरत पर भी बल दिया गया है। रिपोर्ट में इसके अलावा अनौपचारिक विवाद समाधान प्रक्रियाओं पर बहुत अधिक निर्भर न रहने की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि इससे लंबे समय में कानूनी जवाबदेही कम हो सकती है। अध्ययन में यह जांच की गई कि क्या भारतीय पुलिस बलों में महिलाओं का प्रतिशत अधिक होने से संस्थागत जिम्मेदारी बेहतर होती है, न्याय के बेहतर नतीजे मिलते हैं और लैंगिक उत्पीडन अपराधों की शिकार महिलाओं का भरोसा बढ़ता है।
भारत में महिलाओं के खिलाफ लैंगिक उत्पीडन सार्वजनिक और निजी दोनों जगहों पर होता है। सामाजिक कलंक, डर और घरेलू हिंसा के निजी स्वभाव के कारण, अक्सर इनका पता नहीं चल पाता। रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत पहलों के बावजूद भारतीय कानून प्रवर्तन में महिलाओं की भागीदारी अभी भी कम है। पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो के अनुसार 2022 तक भारत के पुलिस बल में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 11.75 प्रतिशत थी। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कानून प्रवर्तन कर्मियों के साथ पूरे भारत में समूह चर्चाएं आयोजित कीं और अपने निष्कर्षों को अपराध विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं से सत्यापित कराया।
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