मधुबनी , जनवरी 20 -- बिहार के मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने मंगलवार को कहा कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जायेगा और जिला प्रशासन नियमों के अंतर्गत उनके लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करेगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम,महिलाओं की गरिमा एवं सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय स्थित डीआरडीए सभागार में एक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास निगम मधुबनी की तरफ से संयुक्त रूप से किया गया, जिसमे कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम,निषेध, निवारण) अधिनियम, 2013 ( पॉश एक्ट-2013) के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।

जिला पदाधिकारी श्री शर्मा ने अपने सख्त सन्देश में ऐसे मामलों में सात दिनों के अन्दर कार्रवाई प्रारंभ करने का निर्देश दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा ने अपने संबोधन में स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थान निजी अस्पताल सहित नियमानुसार सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि निर्धारित अवधि के बाद औचक निरीक्षण कराया जाएगा एवं आंतरिक समिति का गठन नहीं पाए जाने पर संबंधित संस्थान पर (पॉश एक्ट -2013 के अंतर्गत नियमानुसार 50,000/- का जुर्माना भी लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यह एक काफी महत्वपूर्ण एवं प्रभावी अधिनियम है।उन्होंने सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में आंतरिक समिति के गठन को अनिवार्य बताया।

इस दौरानजिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने अधिनियम के विधिक पहलुओं, आईसीसी एवं एलसीसी के गठन, संरचना तथा शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष, गोपनीय एवं समयबद्ध निस्तारण 90 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है।

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