ग्रायपुर , मई 10 -- पुरुषों के वर्चस्व वाले माने जाने वाले इलेक्ट्रिशियन कार्यक्षेत्र में अब छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं भी अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसी क्रम में प्रदेश के बिलासपुर जिले के कोनी स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) में विभिन्न गांवों की 20 महिलाओं को वायरिंग, स्विच बोर्ड सुधार एवं विद्युत उपकरणों की मरम्मत का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की नई राह पर आगे बढ़ने को तैयार हैं।

महिलाओं के सशक्तीकरण के उद्देश्य से आर-सेटी बिलासपुर में इस वर्ष पहली बार इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक रोजगार क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर तकनीकी और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं 'बिहान' (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी हुई हैं।

रतनपुर क्षेत्र की एक प्रशिक्षु महिला ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि बिजली का कार्य केवल पुरुषों के लिए उपयुक्त है, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उनकी यह धारणा बदल गई। प्रशिक्षकों ने उन्हें वायरिंग, स्विच बोर्ड सुधार, घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा उपायों और तकनीकी पहलुओं की सरल एवं व्यवहारिक जानकारी दी। अब वे आत्मविश्वास के साथ घरेलू विद्युत समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं और भविष्य में इसी कौशल के आधार पर आय अर्जित करने की योजना बना रही हैं।

मस्तूरी क्षेत्र की डोमगांव निवासी एक अन्य प्रशिक्षु, जो पूर्व से ही निजी कंपनी में इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्यरत है, ने बताया कि प्रशिक्षण से उनके तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों और आधुनिक तकनीकों की बेहतर समझ से कार्य अधिक कुशलता से किया जा सकता है, और यह कार्य सावधानी के साथ महिलाओं के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।

एक अन्य प्रशिक्षु ने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, आवश्यकता केवल अवसर और उचित प्रशिक्षण की होती है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान आवास और भोजन की बेहतर व्यवस्था के साथ-साथ अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उन्हें कार्य के हर पहलू की जानकारी मिली।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, कार्य अनुशासन और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया, जिससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की नई ऊर्जा विकसित हुई है।

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