नैनीताल , जून 19 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पेप्सिको इंडिया के पैकेज्ड खाद्य उत्पाद पर लिखे गए "महा वैल्यू" शब्द को केवल इसी आधार पर मिस ब्रांडिंग मानने से इनकार करते हुए कंपनी पर लगाया गया तीन लाख रुपये का जुर्माना निरस्त कर दिया है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि "महा वैल्यू" शब्द उपभोक्ताओं को कोई झूठा, भ्रामक या भ्रम पैदा करने वाला संदेश देता है।
न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि किसी उत्पाद को मिसब्रांडेड घोषित करने के लिए ठोस कारण और स्पष्ट विश्लेषण आवश्यक है। केवल कानून की धाराओं का उल्लेख कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
मामला वर्ष 2015 का है, जब पौड़ी गढ़वाल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने एक दुकान से पेप्सिको के 'लहर आलू भुजिया' उत्पाद का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। लोक विश्लेषक ने अपनी रिपोर्ट में पैकेट पर "महा वैल्यू" लिखे होने के आधार पर उत्पाद को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत मिसब्रांडेड बताया था।
रिपोर्ट के आधार पर निर्णायक अधिकारी ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड और निर्माता कंपनी पर 1.5-1.5 लाख रुपये, कुल तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। बाद में फूड सेफ्टी अपीलीय अधिकरण ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था।
हाईकोर्ट ने पाया कि लोक विश्लेषक की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि "महा वैल्यू" शब्द किस प्रकार उपभोक्ताओं को गुमराह करता है। रिपोर्ट में केवल यह निष्कर्ष दर्ज किया गया कि उत्पाद मिसब्रांडेड है, लेकिन उसके समर्थन में कोई तथ्यात्मक या तकनीकी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि कंपनी शुरू से यह स्पष्ट करती रही कि "महा वैल्यू" का संबंध उत्पाद की मात्रा (क्वांटिटी) से है, न कि उसकी गुणवत्ता (क्वालिटी) से। कंपनी के अनुसार यह शब्द उपभोक्ताओं को यह बताने के लिए प्रयोग किया गया था कि पैकेज अधिक मात्रा वाला 'वैल्यू पैक' है और यह लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम तथा संबंधित नियमों के अनुरूप है।
न्यायालय ने कहा कि कंपनी की इस दलील पर न तो निर्णायक अधिकारी ने और न ही अपीलीय अधिकरण ने उचित विचार किया। इसी आधार पर अदालत ने 21 दिसंबर 2018 के निर्णायक अधिकारी के आदेश और 31 मई 2024 के अपीलीय अधिकरण के आदेश को निरस्त करते हुए पेप्सिको इंडिया की अपील स्वीकार कर ली तथा उस पर लगाया गया जुर्माना पूरी तरह समाप्त कर दिया।
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