महासमुंद , मार्च 25 -- ) छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले स्थित खल्लारी माता मंदिर में हुए रोपवे हादसे को लेकर राजनीतिक हलचल अब तेज हो गई है।

प्रदेश कांग्रेस समिति (पीसीसी) द्वारा बनाए गए छह सदस्यीय जांच दल ने बुधवार को घटनास्थल का दौरा कर प्रारंभिक जांच में रोपवे संचालन और रखरखाव में गंभीर लापरवाहियों की ओर इशारा किया है।

जांच दल ने मौके का निरीक्षण करते हुए रोपवे के तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं की पड़ताल की। टीम के अनुसार रोपवे में पूरी तरह स्टील केबल के बजाय अंदर नाइलॉन रस्सी का उपयोग किया गया था, जो सुरक्षा मानकों के विपरीत है। दल का कहना है कि यह गुणवत्ता से समझौते का स्पष्ट संकेत है और हादसे का एक प्रमुख कारण हो सकता है।

जांच दल का नेतृत्व खल्लारी विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे से पहले रोपवे का मेंटेनेंस बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ की निगरानी के किया गया। साथ ही अपर स्टेशन का मुख्य चक्का भी मानकों के अनुरूप नहीं बदला गया। उनके अनुसार अनुभवहीन कर्मचारियों से संचालन कराना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि पिछले कुछ महीनों से पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण रोपवे को जनरेटर के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इसके अलावा अनुभवी ऑपरेटरों की जगह कम अनुभव वाले स्थानीय कर्मचारियों को तैनात किया गया और आवश्यक मेंटेनेंस व सुरक्षा जांच प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

जांच दल ने कहा है कि सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही पीसीसी अध्यक्ष को सौंपी जाएगी। वहीं कांग्रेस ने हादसे में मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा तथा घायलों के लिए नि:शुल्क उपचार की मांग सरकार से की है।

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