महासमुंद , जून 17 -- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित बम्हनी गांव में खेत समतल करने के दौरान प्राचीन मंदिर के अवशेष मिलने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग ने बुधवार को इस खोज को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए प्रारंभिक तौर पर अवशेषों को छठी से आठवीं शताब्दी के बीच का माना है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौठान के समीप एक खेत में समतलीकरण कार्य के दौरान विशाल आमलक, द्वारपाल की प्रतिमाएं, नक्काशीदार स्तंभों के खंड तथा गर्भगृह से जुड़े स्थापत्य अवशेष प्राप्त हुए। सूचना मिलने पर पुरातत्व विभाग की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया और प्रारंभिक अध्ययन में संकेत मिले हैं कि यहां कम से कम दो प्राचीन मंदिर विद्यमान रहे होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा अभी भी भूमि के भीतर दबा हो सकता है तथा वैज्ञानिक सर्वेक्षण और संभावित उत्खनन के बाद कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य सामने आ सकते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अवशेषों की स्थापत्य शैली और शिल्पकला इस स्थल के प्राचीन महत्व की पुष्टि करती है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बम्हनी क्षेत्र प्राचीन काल से "पंच देवरी" के नाम से जाना जाता रहा है। जनश्रुतियों के मुताबिक यहां पांच प्रमुख देवस्थल मौजूद थे। वर्तमान में मिले अवशेषों को इन प्राचीन देवस्थलों में से प्रमुख मंदिर का हिस्सा माना जा रहा है। ग्रामीणों ने गांव के अन्य हिस्सों में भी प्राचीन संरचनाओं और मंदिरों के अवशेष होने की संभावना जताई है।

ग्रामीणों का कहना है कि बम्नेश्वर नाथ महादेव मंदिर, शीतला दुर्गा मंदिर तथा किल्ला पारा क्षेत्र भी ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। किल्ला पारा में आज भी प्राचीन नगर के प्रवेश द्वार जैसे अवशेष दिखाई देते हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह क्षेत्र कभी एक विकसित नगर के रूप में स्थापित रहा होगा।

पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार स्थल पर लाल ईंटों और बलुआ पत्थर का उपयोग दिखाई देता है। साथ ही यहां की नक्काशी की शैली सिरपुर स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर से साम्यता रखती है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बम्हनी का यह पुरास्थल सिरपुर कालीन या उससे भी अधिक प्राचीन हो सकता है।

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