महासमुंद , सितंबर 19 -- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खरीफ मौसम के दौरान लगातार बारिश, बादल, खेतों में अधिक नमी और उमस के कारण धान तथा सब्जियों की फसलों में विभिन्न रोगों और कीटों का प्रकोप दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि नियंत्रण के लिए दवाओं और कीटनाशकों का इस्तेमाल करने के बावजूद कई स्थानों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।
जिले में धान की फसल में भूरा माहो, तना छेदक, गंगई, ब्लास्ट और पत्ती मोड़क सहित विभिन्न रोग एवं कीटों का असर देखने को मिल रहा है। वहीं सब्जियों की फसलों में फंगस, सड़न-गलन, ब्लाइट और अन्य रोगों के कारण किसान परेशान हैं।
महासमुंद जिले में इस खरीफ मौसम में करीब दो लाख 41 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जा रही है। जिले में धान की अर्ली और लेट वेरायटी के साथ मोटा, पतला तथा सरना किस्मों की खेती होती है। धान उत्पादन और उपार्जन की दृष्टि से महासमुंद राज्य के प्रमुख जिलों में शामिल है।
धान के साथ जिले में 12 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती भी की जा रही है। छोटी बाड़ियों से लेकर बड़े फार्मों तक फूलगोभी, पत्तागोभी, करेला, टमाटर, बैंगन, भिंडी, लौकी, खीरा, मिर्च, सेम, बरबट्टी और विभिन्न प्रकार की भाजियों का उत्पादन किया जा रहा है।
किसानों के अनुसार रोग और कीटों पर नियंत्रण के लिए वे निजी कृषि केंद्रों से महंगी दवाएं खरीदने के साथ सहकारी समितियों से भी दवाएं ले रहे हैं, लेकिन कई खेतों में अपेक्षित असर नहीं दिखाई दे रहा है। इससे फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को कीटनाशक एवं अन्य कृषि दवाओं की खरीदी करते समय पक्का बिल लेने तथा कृषि विस्तार अधिकारियों की सलाह के अनुसार ही दवाओं का चयन और निर्धारित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी है।
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