महासमुंद , अप्रैल 24 -- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों में नौनिहालों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किए जाने वाले आरओ वाटर प्यूरीफायर सिस्टम विभागीय लापरवाही के कारण 'शोपीस' बनकर रह गए हैं। सक्षम आंगनबाड़ी योजना एवं जिला खनिज न्यास मद से करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद अधिकांश केंद्रों में अब तक आरओ सिस्टम चालू नहीं हो पाए हैं।
जिले में कुल 1795 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां लगभग 65 हजार बच्चे प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करते हैं। इन बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए महिला एवं बाल विकास संचालनालय द्वारा सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत 600 आरओ प्यूरीफायर (प्रति इकाई 15 हजार रुपये) के लिए करीब 90 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसके अलावा जिला खनिज न्यास मद से 640 आरओ सिस्टम (प्रति इकाई 49,650 रुपये) के लिए लगभग तीन करोड़ 17 लाख 76 हजार रुपये खर्च कर जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी की गई।
एक वर्ष बीत जाने के बाद भी हालांकि जमीनी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में आरओ प्यूरीफायर या तो दीवारों पर बिना उपयोग के टंगे हुए हैं, या स्टोर रूम में रखे हैं, या फिर सुरक्षा के नाम पर कार्यकर्ताओं के घरों में रखे गए हैं। पानी की उपलब्धता और इंस्टॉलेशन के अभाव में ये उपकरण अब तक चालू नहीं हो सके हैं, जिससे नौनिहाल शुद्ध पेयजल से वंचित हैं।
स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का कहना है कि करीब एक वर्ष से आरओ मशीनें केंद्रों में पड़ी हुई हैं लेकिन आवश्यक सुविधाएं नहीं होने के कारण उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस बीच विभाग द्वारा संबंधित ठेकेदार को पहली किस्त के रूप में 63 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है।
जनप्रतिनिधियों ने इस स्थिति को विभागीय लापरवाही बताते हुए कहा है कि योजनाओं के सही क्रियान्वयन के अभाव में बच्चों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इधर, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि बिना आधारभूत सुविधाओं के इस प्रकार की खरीदी क्यों की गई और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी।
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