चेन्नई , फरवरी 15 -- महाशिवरात्रि के मौके पर देश भर से आये लाखों श्रद्धालुओं ने यहां भगवान शिव के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की। लगभग सभी शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा और दर्शन के लिए लोगों को कई घंटों तक कतार में प्रतीक्षा करनी पड़ी।

रामेश्वरम के प्राचीन श्री रामनाथस्वामी मंदिर में हजारों तीर्थयात्रियों ने दर्शन किये। समुद्र और 'अग्नि तीर्थम' (पवित्र जल) में पवित्र स्नान के बाद पुरुषों और महिलाओं ने अपने बच्चों के साथ विशेष प्रार्थना की। रामनाथपुरम जिला प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किये थे और पेयजल , शौचालय की सुविधा और भोजन केंद्रों सहित सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायीं।

कन्याकुमारी के दक्षिणी छोर पर राज्य भर और पड़ोसी केरल के हजारों श्रद्धालुओं ने सप्ताह भर के व्रत के बाद महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में 12 शिव मंदिरों को कवर करने वाली पारंपरिक 'महाशिवरात्रि दौड़' अनुष्ठान में भाग लिया।

कन्याकुमारी जिले के ये 12 शिव मंदिर (शिवालयम), जिनकी महाशिवरात्रि 'शिवालय ओट्टम' (शिव मंदिरों की दौड़) तीर्थयात्रा के दौरान पारंपरिक रूप से यात्रा की जाती है। ये सभी 82 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं, जो एक अद्वितीय 24 घंटे की आध्यात्मिक मैराथन का प्रतीक है। श्रद्धालुओं ने रविवार महाशिवरात्रि के दिन तिरुमलई से अपनी दौड़ शुरू की और उत्सव के समापन के लिए तिरुनट्टलम स्थित भगवान शिव के मंदिर पहुंचेंगे।

'शिवालय ओट्टम' की शृंखला में आने वाले 12 मंदिरों में तिरुमलई महादेव मंदिर (मुंचिराई), थिक्कुरिची महादेव मंदिर, तिरुपरप्पु महादेव मंदिर, तिरुनांथिकराई महादेव मंदिर, पोनमनई महादेव मंदिर, पन्नीपगम महादेव मंदिर, कल्कुलम महादेव मंदिर (कल्लाईदकुरिची), मेलानकोड महादेव मंदिर, तिरुविदैकोड महादेव मंदिर, तिरुविथमकॉड महादेव मंदिर, तिरुप्पन्तिकोड महादेव मंदिर, तिरुुनट्टलम महादेव मंदिर शामिल हैं।

इस तीर्थयात्रा का महत्व मंदिरों के बीच आवाजाही के दौरान 'गोविंदा गोपाला' का जाप करने में निहित है (जो भीम के शिव लिंग ले जाने की पौराणिक कथा से जुड़ा है)। तिरुमलई मंदिर में विशेष पूजा आयोजित की गयी, जहां से श्रद्धालुओं ने मुंचिराई स्थित पहले शिवालयम में ताम्रपर्णी नदी में पवित्र डुबकी लगाने के बाद अपनी तीर्थयात्रा शुरू की।

इस दौड़ के दौरान प्रतिभागी भगवा वस्त्र धारण करते हैं, हाथ में ताड़ के पत्ते का पंखा लिये होते हैं और दौड़ते हुए पूरे दिन 'गोविंदा... गोपाला...' मंत्र का जाप करते हैं। तीर्थयात्री तिरुनट्टलम मंदिर में समापन से पहले सभी ग्यारह मंदिरों से पवित्र भस्म 'तिरुनीर' प्राप्त करते हैं।

माना जाता है कि इस तीर्थयात्रा का उद्देश्य तिरुनट्टलम के अंतिम संकरनारायण मंदिर से चंदन का लेप प्राप्त करने के बाद ही पूर्ण होता है।

इस बीच विदेशों से आये लोगों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र का दौरा किया और विशेष प्रार्थना एवं ध्यान में भाग लिया। शाम 6:00 बजे सद्गुरु के योगेश्वर लिंग के महाअभिषेकम के बाद रात भर चलने वाले उत्सव का आयोजन किया जायेगा। इसके बाद मध्यरात्रि महामंत्र दीक्षा, विशेष संगीत, पारंपरिक और युद्ध कला का प्रदर्शन और आदियोगी दिव्य दर्शनम (योग की उत्पत्ति को दर्शाने वाला एक वीडियो इमेजिंग शो) प्रस्तुत किया जायेगा।

यह उत्सव सोमवार सुबह 6:00 बजे संपन्न होगा।

ईशा फाउंडेशन कोयंबटूर शहर से लगभग 40 किमी दूर, नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व से सटे वेल्लियांगिरी पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है।

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