भोपाल, (वार्ता) महाशिवरात्रि के अवसर पर रविवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में हिमांगी सखी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पट्टाभिषेक किया गया।
आयोजकों के अनुसार पुष्कर स्थित पुष्कर पीठ को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ के रूप में घोषित किया गया है। कार्यक्रम में किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की उपस्थिति में यह घोषणा की गई। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए किन्नर समुदाय के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और अनुयायी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान 60 धर्मांतरित किन्नरों की 'घर वापसी' कराए जाने का दावा भी किया गया। मंच से कहा गया कि मुस्लिम धर्म स्वीकार कर चुके कुछ किन्नरों ने शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म अपनाया। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सम्मेलन में किन्नर परंपरा के अंतर्गत चार जगद्गुरु और पांच महामंडलेश्वरों की भी घोषणा की गई। घोषित जगद्गुरुओं में काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना सखी (भोपाल) और संचिता (महाराष्ट्र) शामिल हैं। वहीं महामंडलेश्वरों के रूप में सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर और सागर के नाम घोषित किए गए।
किन्नरों की पहली शंकराचार्य हिमांगी सखी मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हैं और किन्नर समाज की धार्मिक नेतृत्वकर्ता के रूप में जानी जाती हैं। मूल रूप से मुंबई से संबंध रखने वाली हिमांगी सखी पूर्व में महामंडलेश्वर और जगद्गुरु पद पर रह चुकी हैं। पट्टाभिषेक के साथ ही किन्नर अखाड़े ने उन्हें शंकराचार्य की उपाधि प्रदान की है।
उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में भोपाल में किन्नर समुदाय के भीतर धर्म परिवर्तन और गद्दी विवाद को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला है। ऐसे में महाशिवरात्रि पर आयोजित यह सम्मेलन और पट्टाभिषेक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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