नागपुर , अप्रैल 10 -- महाराष्ट्र में बच्चों में गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडीएस) के बढ़ते मामलों पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नागपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी के तहत राज्य का सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग और एम्स नागपुर बच्चों में होने वाले एनसीडीएस की शुरुआती पहचान, निदान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन पर मिलकर काम करेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मकसद मधुमेह, अस्थमा, जन्मजात हृदय विकार, आनुवांशिक रक्त विकार, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसी बीमारियों पर ध्यान केंद्रित करना है, जिनके मामले राज्य में बच्चों के बीच तेजी से सामने आ रहे हैं।

इस कार्यक्रम का लक्ष्य क्षमता निर्माण, चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण और जिला स्तर पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाकर मौजूदा स्वास्थ्य सेवा ढांचे को और मजबूत करना भी है।

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल निवारक स्वास्थ्य देखभाल और शुरुआती समाधान को प्राथमिकता देगी। उन्होंने बताया कि वयस्क अवस्था में होने वाली कई बीमारियों की जड़ें बचपन में ही पनपने वाले जोखिम कारकों में होती हैं, जिनमें खराब खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वस्थ जीवनशैली शामिल हैं।

इसके अलावा इस सहयोग के तहत समुदाय-आधारित पहुंच, जागरूकता अभियान और डेटा-आधारित रणनीतियों का भी सहारा लिया जाएगा, ताकि जोखिम वाले बच्चों की पहचान की जा सके और उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सके।

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