मुंबई , जून 23 -- महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक विधेयक का मसौदा तैयार करने के वास्ते एक विशेष समिति का गठन किया गया है। राज्य सरकार का यह कदम अन्य भाजपा शासित राज्यों द्वारा अपनाए गए विधायी मार्ग के अनुरूप है।

विधानसभा सत्र को संबोधित करते हुए गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने सदन को सूचित किया कि सरकार इस कानून को प्रभावी बनाने के लिए शत-प्रतिशत प्रतिबद्ध है और इसका मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।

मंत्री ने दमनकारी सामाजिक प्रथाओं पर अंकुश लगाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए राज्य के इस कदम को उचित ठहराया। उन्होंने नासिक की एक हाल की घटना का हवाला दिया, जहां एक व्यक्ति ने कथित तौर पर मोबाइल फोन और ईमेल के माध्यम से अपनी पत्नी को तलाक दे दिया और उसके आठ दिनों के भीतर महिला के साथ हिंसक मारपीट की गई।

श्री कदम ने कहा, "ऐसी प्रथाएं जहां केवल एक फोन कॉल या ईमेल के माध्यम से विवाह समाप्त कर दिया जाता है, बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। ऐसी रूढ़िवादी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य में किसी भी महिला को अन्याय का सामना न करना पड़े, समान नागरिक संहिता आवश्यक है।"इस कानून को लागू करने की शुरुआत उत्तराखंड द्वारा की गई थी, जो समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। उत्तराखंड ने 27 जनवरी, 2025 को इसे आधिकारिक रूप से लागू करने की घोषणा की थी।

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