मुंबई , जुलाई 09 -- महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को राज्य के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने को एक सात सदस्यीय कमेटी के गठन का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में यह ऐलान करते हुए इस कदम को भारत के संविधान में शामिल 'राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों' के अनुरूप बताया, जो राज्य से नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने को कहते हैं।
कानूनी और नीति-निर्माता वाली इस कमेटी को समान नागरिक संहिता लागू करने से जुड़े कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तार से अध्ययन करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस कमेटी की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। इस कमेटी में अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) आरसी चव्हाण, न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) एसजी मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, अधिवक्ता वीरेंद्र सराफ, सामाजिक और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ रमेश पतंगे और शिक्षाविद डॉ. सुवर्णा रावल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सदन को बताया, "कमेटी को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया है।" उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य नागपुर में होने वाले राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रस्तावित कानून को पेश करना है।
मुख्यमंत्री ने सरकार के द्वारा आगे की कार्रवाई तभी तय करने की बात कही जब कमेटी अपना विस्तृत अध्ययन और निष्कर्ष सौंप देगी। इस कदम को एक बड़े नीति बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद राज्य के अलग-अलग समुदायों में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े कानूनों में एकरूपता लाना है।
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