मुंबई , अक्टूबर 23 -- महाराष्ट्र सरकार ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से जारी खाद्य सुरक्षा नियमों और निर्देशों के एक सेट के खिलाफ यह कहते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है ये नियम राज्य के अधिकारियों के विधिक) अधिकारों का अतिक्रमण करते हैं।
राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि एफएसएसएआई के शुरू किये गये नियामक ढांचे ने खाद्य क्षेत्र में लाइसेंसिंग और प्रवर्तन के लिए एक समानांतर प्रशासनिक ढांचा तैयार कर दिया है, जिससे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत राज्य के अधिकारियों को सौंपी गयी भूमिका कमजोर होती है।
राज्य सरकार के अनुसार, इस कानून में ऐसी व्यवस्था की परिकल्पना की गयी है जिसमें राज्य द्वारा नामित अधिकारी खाद्य सुरक्षा उपायों को लागू करने और अनुपालन की निगरानी में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। लेकिन बाद के नियामक बदलावों और अतिरिक्त पदों के सृजन से राज्य के अधिकारियों के अधिकारों में लगातार कटौती हुई है।
महाराष्ट्र ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए उच्च न्यायालय से ऐसे प्रावधानों और नियमों को संवैधानिक आधार पर रद्द करने का आग्रह किया है।
राज्य ने मई 2023 में जारी किये गये उस निर्देश पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की है, जो राज्य के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को केंद्रीय लाइसेंस रखने वाली खाद्य व्यावसायिक इकाइयों का निरीक्षण करने से रोकता है।
सरकार द्वारा मांगी गयी एक अन्य मुख्य राहत एफएसएसएआई द्वारा रखे गये खाद्य व्यवसाय लाइसेंसिंग डेटाबेस को संबंधित राज्य-नामित अधिकारियों को स्थानांतरित करना है।
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