मुंबई , जुलाई 07 -- महाराष्ट्र विधान परिषद में मंगलवार को छत्रपति संभाजीनगर में 'रमाई आवास घरकुल योजना' से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले के आरोपों को लेकर भारी हंगामा हुआ। शिवसेना (यूबीटी) के नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने इन कथित अनियमितताओं की एक उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग की है।

उच्च सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए श्री दानवे ने आरोप लगाया कि वंचितों के आवास के लिए बनी इस योजना में स्थानीय अधिकारियों, परियोजना प्रबंधन सलाहकारों और निजी एजेंटों की मिलीभगत के कारण गंभीर गड़बड़ी की गई है। उन्होंने दावा किया कि फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर किया गया है।

श्री दानवे ने आरोप लगाया कि लाभार्थियों की सूची को डिजिटल प्रणाली से बनाए रखा जाना आवश्यक था, लेकिन उसे साधारण तरीके से तैयार किया गया और बाद में बिना किसी उचित जांच या सत्यापन के समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुमोदित कर दिया गया।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारियों और इंजीनियरों ने अनिवार्य स्थल निरीक्षण किए बिना ही परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए फर्जी राशन कार्ड और संपत्ति कर की रसीदें बनाई गईं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जो बताते हैं कि इन दस्तावेजों को फर्जी तरीके से तैयार करने में राज्य के ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों के नामों का दुरुपयोग किया गया था।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रशासन पर योजना के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया और ऐसे उदाहरणों का जिक्र किया जहां पति और पत्नी दोनों को स्वतंत्र आवास लाभ दिए गए, जबकि नियम के अनुसार यह आवंटन प्रति परिवार केवल एक तक ही सीमित है।

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