मुंबई , जून 23 -- महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र मंगलवार को तनावपूर्ण माहौल में शुरू हुआ जिसमें सदन में मंत्रियों की जवाबदेही तथा उनके अधिकारों को दूसरों को सौंपने के मुद्दे पर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन एवं विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
हंगामे की शुरुआत तब हुई जब शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति में राज्य मंत्रियों या कनिष्ठ मंत्रियों के जवाब दिए जाने पर कड़ा विरोध जताया। पीठासीन अधिकारी के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट होकर श्री ठाकरे ने सरकार पर विधायी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। विधान भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए श्री ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की और सरकार पर प्रशासनिक अक्षमता तथा तैयारियों की कमी का आरोप लगाया।
श्री ठाकरे ने आरोप लगाया, "इस सरकार ने अक्षमता की नई मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री अन्य गतिविधियों में व्यस्त दिखाई देते हैं, लेकिन सदन में उत्तर देने के लिए अपने ही विभाग की फाइलों का अध्ययन करने की गंभीरता उनमें नहीं है।" उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के उस तर्क को भी चुनौती दी, जिसमें उन्होंने मंत्रियों की अनुपस्थिति में दूसरों द्वारा जवाब दिए जाने को सही ठहराने के लिए साल 2019-2020 के उदाहरणों का हवाला दिया था।
श्री ठाकरे ने कहा, "अध्यक्ष को आसन से गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए। महाविकास अघाड़ी के कार्यकाल के दौरान हर मंत्री ने सीधे सवालों के जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी निभाई थी।"सदन के भीतर, मंत्री शंभूराज देसाई ने इन आरोपों का जवाब देते हुए विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। श्री देसाई ने सवाल किया, "अध्यक्ष सदन के संरक्षक हैं और काम का आवंटन नियमों के अनुसार ही किया जाता है। महाविकास अघाड़ी सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री खुद शायद ही कभी सवालों के जवाब देते थे और अक्सर वे अपने सवाल दूसरे मंत्रियों को सौंप देते थे। फिर इस सरकार के लिए अलग मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है?"उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष के इस विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया। हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के अपने गुट में शामिल होने का जिक्र करते हुए श्री शिंदे ने कहा कि विपक्ष की हताशा लगातार मिल रहे राजनीतिक झटकों का नतीजा है।
श्री शिंदे ने कहा, "यह सामूहिक जिम्मेदारी वाली सरकार है। यदि किसी राज्य मंत्री को कोई कठिनाई आती है, तो मैं हस्तक्षेप करने के लिए सदन में मौजूद हूँ। जिनके घर शीशे के होते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।" उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि वे बहिर्गमन का रास्ता चुनने के बजाय किसानों और आम जनता से जुड़े रचनात्मक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित