मुंबई , जून 25 -- महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य की स्टाम्प शुल्क पंजीकरण प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की महालेखाकार (एजी) की देखरेख में एक व्यापक राज्य-स्तरीय जांच कराने की घोषणा की।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की कि एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 के बीच दर्ज मामलों की जांच के लिए एक विशेष कार्य बल बनेगा। यह कदम सदन में हुई उस चर्चा के बाद उठाया गया, जिसमें सदस्यों ने भ्रष्टाचार और राजस्व के नुकसान पर गहरी चिंता जतायी थी। श्री बावनकुले ने स्पष्ट किया कि निष्पक्षता के लिए यह जांच पूरी तरह से एजी की देखरेख में होगी।
श्री बावनकुले ने कहा, " यह केवल एक सामान्य जांच नहीं है। हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ पूर्ण सख्ती की नीति अपनायी है। अगर कोई भी अधिकारी स्टाम्प अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया, तो उसे तत्काल निलंबन, आपराधिक मुकदमों और सेवा से स्थायी बर्खास्तगी का सामना करना पड़ेगा।"उन्होंने हाल ही में हुई एक बड़ी अनियमितता का उल्लेख किया, जिसमें एक वरिष्ठ लिपिक ने स्टाम्प शुल्क अधिकारी का प्रभार संभालते हुए महज 10 दिनों की अवधि में कथित तौर पर 941 से अधिक दस्तावेजों का पंजीकरण कर दिया था। इसमें अनधिकृत इमारतों का पंजीकरण किया गया, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 13.91 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। इस मामले में संबंधित अधिकारी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।
स्टाम्प शुल्क अधिकारियों के न्यायिक शक्तियों के भविष्य में दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार एक नयी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करेगी और जल्द ही एक औपचारिक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी किया जाएगा।
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