मुंबई , सितंबर 19 -- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने शनिवार को राज्य के कई हिस्सों को सूखा क्षेत्र घोषित करने में हो रही देरी पर महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि कम बारिश और लंबे सूखे के दौर के कारण फसलों के भारी नुकसान का सामना कर रहे किसानों को राहत के लिए बेवजह इंतजार कराया जा रहा है।
श्री पवार ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि लौटते मानसून की बारिश की उम्मीद में सूखे की आधिकारिक घोषणा को टालना संकटग्रस्त किसानों का मजाक उड़ाने जैसा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि सरकार इस उम्मीद में बैठी है, तो किसान इस उपेक्षा के लिए सरकार को कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने पड़ोसी राज्य कर्नाटक का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब कर्नाटक सरकार अगस्त में ही 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर केंद्र के एनडीआरएफ से सहायता मांग सकती है, तो महाराष्ट्र सरकार कदम उठाने में पीछे क्यों हट रही है।
केंद्र सरकार के 'वेदास' उपग्रह आंकड़ों का हवाला देते हुए विधायक ने दावा किया कि राज्य के 203 तालुकों में बारिश में बड़ी कमी दर्ज की गयी है। इसके अलावा, 140 तालुकों में कम बारिश के साथ-साथ चार सप्ताह का सूखा स्पेल और 280 तालुकों में तीन सप्ताह का 'ड्राई स्पेल' देखा गया है। उन्होंने कहा कि सूखा नियमावली के अनुसार यह स्थिति तुरंत सूखा राहत तंत्र को सक्रिय करने और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए पर्याप्त है।
श्री पवार ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया है कि पांच अक्टूबर से पहले पंचनामा (फसल क्षति का आकलन) करने से एनडीआरएफ की केंद्रीय मदद के लिए पात्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि सूखा घोषित करने और पांच अक्टूबर की तारीख के बीच कोई कानूनी संबंध नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह 10 दिनों के भीतर राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए, औपचारिकताएं छोड़कर प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 50,000 रुपये का मुआवजा, कर्ज माफी और छात्रों की फीस माफी जैसी राहत तुरंत प्रदान करे।
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