मुंबई , अगस्त 19 -- महाराष्ट्र सरकार रक्षाबंधन के त्योहार के अवसर पर 28 अगस्त से पूरे राज्य में 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' लागू करेगी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद राज्य के गृह विभाग ने आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी कर गैर-कानूनी धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानूनी ढांचा स्थापित कर दिया है।

इस नए कानून को बलपूर्वक, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन या छल से किए गए विवाह से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसमें कानून तोड़ने वालों के लिए कड़े और गैर-जमानती दंड के प्रावधान किए गए हैं।

इस अपराध के लिए 7 साल तक की कैद और एक लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं, नाबालिगों, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के धर्मांतरण या सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 7 साल तक की जेल और 5 लाख रूपये तक का जुर्माना हो सकता है।बार-बार कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को 10 साल तक की विस्तारित जेल और 7 लाख रूपये तक के जुर्माने की सजा दी जा सकेगी।

धर्मांतरण की इच्छा रखने वाले व्यक्ति या इसका आयोजन करने वाली संस्था को प्रक्रिया से 60 दिन पूर्व ज़िलाधिकारी या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष औपचारिक सूचना देनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार के पास एक औपचारिक घोषणा पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

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