मुंबई , फरवरी 16 -- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-अजित पवार समूह) की नेता एवं राज्य की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सोमवार को यहां पार्टी के नेताओं के साथ बैठक कीसुश्री पवार ने पिछले हफ्ते पार्टी के नेता और खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण मंत्री नरहरि ज़िरवाल के कार्यालय पर भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी ) कीे छापे और कार्यालय बंद किये जाने से पैदा हुए राजनीतिक हालात का जायज़ा लिया।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना और कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर श्री ज़िरवाल के इस्तीफे की मांग की है।

इस बीच एसीबी ने नासिक ज़िले में आरोपी लिपिक राजेंद्र धेरंगे के घर पर छापा मारा, जो कथित तौर पर पिछले हफ्ते रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था, जिससे राकांपा पर भारी दबाव पड़ा है। एसीबी द्वारा गिरफ्तार किये गये आरोपी लिकिप धेरंगे को आज यहां अदालत में पेश किया गया।

अभी तक विधायक अमोल मिटकरी के अलावा राकांपा का कोई भी नेता श्री ज़िरवाल के बचाव में नहीं आया है। श्री मिटकरी ने कहा है कि श्री जिरवाल को इस मामले में फंसाया गया है। श्री मिटकरी ने पिछले हफ़्ते कहा था, "श्री ज़िरवाल बेगुनाह हैं। उन्हें इस मामले में फंसाने का ठेका किसने लिया, इसकी विस्तृत जानकारी बहुत जल्द सामने आ जाएंगी। श्री ज़िरवाल राकांपा के वरिष्ठ नेता हैं और आदिवासी समुदाय के आम लोगों का चेहरा हैं। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।"वहीं राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि श्री ज़िरवाल को उनके दफ्तर पर एसीबी के छापे के बारे में अंधेरे में क्यों रखा गया और छापा उस समय पर जब वह दिल्ली में थे। सूत्रों ने कहा कि चूंकि एसीबी का छापा महाराष्ट्र राज्य सचिवालय भवन (मंत्रालय) के परिसर में पड़ी थी, , इसलिए ज़ाहिर है कि इसके लिए गृहमंत्रालय से हरी झंडी मिली थी, जिसके प्रमुख खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं, जिनका कार्यालय मंत्रालय की दूसरी मंज़िल पर श्री ज़िरवाल के कार्यालय से मुश्किल से कुछ गज की दूरी पर है।

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