नागपुर , अगस्त 6 -- महाराष्ट्र में नागपुर के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) और इंदिरा गांधी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेयो) में रेजीडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन गुरुवार को भी चिकित्सा सेवाएं बाधित रहीं।
प्रदेश भर में रेजीडेंट डॉक्टर के आह्वान पर यह हड़ताल राज्य सरकार के उस फैसले के विरोध में है, जिसमें ब्रिज कोर्स पूरा करने वाले होम्योपैथी चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने और आधुनिक चिकित्सा का अभ्यास करने की अनुमति दी गयी है।
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल और मेयो अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टरों ने मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स (सीसीएमपी) पूरा करने वाले बीएचएमएस डॉक्टरों का महाराष्ट्र चिकित्सा परिषद में पंजीकरण करने के प्रस्ताव के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया है।
रेजीडेंट डॉक्टरों के नियमित कर्तव्यों से अलग रहने के कारण, दोनों अस्पतालों में बाह्य रोगी विभागों (ओपीडी), वैकल्पिक सर्जरी और गैर-आपातकालीन सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आवश्यक चिकित्सा उपचार बिना किसी बाधा के जारी रहे, आपातकालीन मामलों और गहन चिकित्सा सेवाओं को संभालने के लिए वरिष्ठ संकाय सदस्यों और सलाहकारों को तैनात किया गया था।
अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि जिन मरीजों को गैर-ज़रूरी प्रक्रियाओं की आवश्यकता थी, उन्हें आगे की तारीखें दी जा रही हैं। आपातकालीन सर्जरी और गहन चिकित्सा सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर संभाला जा रहा है। इस व्यवधान के कारण सैकड़ों मरीजों को असुविधा हुई है। इनमें से कई मरीज इलाज के लिए विदर्भ के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी राज्यों से आये थे।
प्रदर्शनकारी चिकित्सकों ने कहा है कि जब तक सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनका तर्क है कि अन्य चिकित्सा प्रणालियों के चिकित्सकों को एलोपैथी का अभ्यास करने की अनुमति देने से मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता से समझौता हो सकता है।
राज्य सरकार ने हड़ताली चिकित्सकों के साथ बातचीत में अभी तक किसी नतीजे की घोषणा नहीं की है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित