मुंबई , मार्च 25 -- महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में डिजिटल सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिये करीब 2,000 करोड़ रुपये की साइबर सुरक्षा परियोजना लागू की है।
गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा को यह जानकारी देते हुये कहा कि महाराष्ट्र ऐसी उन्नत साइबर सुरक्षा पहल को तैनात करने वाले एशिया के अग्रणी क्षेत्रों में से एक है, जो साइबर अपराध के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों और प्रणालियों से लैस है।
उन्होंने राज्य में वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर विधायक विकास ठाकरे की शुरू की गई चर्चा का जवाब देते हुए ये विवरण साझा किए।
श्री कदम ने समय पर कार्रवाई की तात्कालिकता पर जोर देते हुए साइबर अपराध की शिकायतों को तुरंत दर्ज करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि "स्वर्णिम घंटे" का प्रभावी उपयोग वित्तीय नुकसान को काफी कम कर सकता है। रिपोर्ट करने में देरी की वजह से जालसाज अक्सर कई खातों में पैसा स्थानांतरित करने या धन को विदेश भेजने में सफल हो जाते हैं। कुछ उदाहरणों में, चोरी किया गया पैसा महज 30 मिनट के भीतर 250 से 300 खातों में विभाजित कर दिया जाता है, जिससे उसकी वसूली और भी कठिन हो जाती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि पीड़ितों को धोखा देने के लिए साइबर अपराधी "डिजिटल गिरफ्तारी" जैसे परिष्कृत तरीके अपना रहे हैं। इंटरनेट की बढ़ती सुलभता ने कम पढ़े-लिखे व्यक्तियों को भी हैकिंग और अन्य साइबर अपराधों में शामिल होने में सक्षम बनाया है, जो प्रवर्तन के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित