मुंबई , अप्रैल 22 -- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक में बुनियादी ढांचे, स्वच्छ ऊर्जा और प्रशासनिक सुगमता को बढ़ावा देने के लिए चार बड़े फैसलों को मंजूरी दी गयी।

राज्य ने पर्यावरण के अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए अपनी नयी कंप्रेस्ड बायोगैस नीति की आधिकारिक घोषणा की है। इसके कार्यान्वयन की निगरानी के लिए हर जिले में एक समन्वय समिति स्थापित की जायेगी। इन परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के माध्यम से क्रियान्वित किया जायेगा। चालू वर्ष के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन मंजूर किया गया है। इस कदम का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और ठोस कचरे का स्थायी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

सरकार ने जमीन को 'ऑक्यूपेंसी क्लास-2' (प्रतिबंधित) से 'ऑक्यूपेंसी क्लास-1' (फ्रीहोल्ड) में बदलने के लिए प्रीमियम दरों को पुनर्गठित किया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने घोषणा की कि गैर कृषि अनुमति की अनिवार्य आवश्यकता को अब खत्म कर दिया गया है। डेवलपर्स अब 'बिल्डिंग परमिशन मैनेजमेंट सिस्टम' (बीपीएमएस) के माध्यम से रूपांतरण प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। महाआईटी सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जमीन की स्थिति बिना किसी भौतिक दस्तावेज के स्वचालित रूप से अपडेट हो जायेगी।

पश्चिमी महाराष्ट्र में प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए, कैबिनेट ने आईटी पार्क हेतु भूमि आवंटन को मंजूरी दी है। सतारा जिले के नागेवाड़ी में 42.55 हेक्टेयर भूमि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) को हस्तांतरित की जायेगी। इसका उद्देश्य सतारा और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार और व्यावसायिक अवसर पैदा करना है।

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