मुंबई , जुलाई 20 -- महाराष्ट्र के प्रशासनिक मुख्यालय, मंत्रालय में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दफ़्तर तक पहुंच गया है।

हाल ही में महाराष्ट्र के तीसरे सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का ऐतिहासिक राजनीतिक मुकाम हासिल करने वाले श्री फडणवीस ने खुद इस मामले में दखल दिया। उन्होंने छठी मंज़िल पर स्थित अपने दफ़्तर में एक बैठक के दौरान परोसी गयी कॉफ़ी से बदबू आने पर यह कदम उठाया। उनके तुरंत दखल के बाद दफ़्तर में बोतलबंद मिनरल वॉटर का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया, लेकिन इस संकट ने इमारत की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की बड़ी खामियों को उजागर कर दिया है।

माना जा रहा है कि ज़मीन के नीचे बने भंडारण टैंक खराब होने की वजह से पानी दूषित हो गया है, जिससे पूरी इमारत में लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई अधिकारियों और कर्मचारियों में उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण देखे गए हैं, और कुछ लोगों को पीलिया के इलाज के लिए अस्पताल भी जाना पड़ा है। इस स्थिति से कर्मचारियों में काफ़ी चिंता है, क्योंकि अब उन्हें राज्य प्रशासन के मुख्य केंद्र में ही सेहत से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है; कर्मचारी यूनियन और अधिकारी इमारत की पानी की सप्लाई व्यवस्था के रखरखाव में भारी लापरवाही के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। भंडारण टैंक की सफ़ाई के लिए अंदरूनी निर्देश मिलने के बावजूद, पानी का दूषित होना जारी है। इस वजह से कर्मचारियों को खुद ही कदम उठाने पड़ रहे हैं और सुरक्षा के लिहाज़ से कई लोग अब काम पर अपना बोतल बंद पानी साथ ला रहे हैं।

मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल के पास औपचारिक शिकायतें दर्ज करायी गयी हैं और कर्मचारी इन अस्वच्छ हालात के लिए ज़िम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

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