मुंबई , जून 29 -- महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति के 27 विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और अनुसूचित जाति आरक्षण के प्रस्तावित उप-वर्गीकरण का विरोध किया तथा सरकार से इसे लागू न करने का आग्रह किया।
विधायकों ने इस प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसे लागू किया गया तो इससे अशांति फैल सकती है। उन्होंने आनंदराज अंबेडकर के नेतृत्व में 1 जुलाई को विधान भवन तक निकाले जाने वाले विरोध मार्च को भी अपना समर्थन देने की घोषणा की।
सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने आश्वासन दिया कि बिना उचित विचार-विमर्श के कोई निर्णय नहीं लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस प्रस्ताव पर एक लाख से अधिक आपत्तियां और प्रतिवेदन प्राप्त हुए हैं और जब तक सभी प्रस्तुतियों की जांच नहीं हो जाती, तब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
श्री शिरसाट ने कहा, "सरकार सभी वर्गों को न्याय सुनिश्चित करेगी। बिना उचित विचार-विमर्श के कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।"यह प्रस्ताव न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसकी कई दलित संगठनों और नेताओं ने आलोचना की है। उन्होंने इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस मुद्दे को कांग्रेस नेता नितिन राउत और विपक्ष के अन्य सदस्यों ने महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठाया है।
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